फरीदाबाद। पांच दिवसीय वैदिक व्यापार सुत्र-श्रीमद् विश्वकर्मा महापुराण कथा के तीसरे दिन संतश्री वैष्वकर्मण धर्माधिकारी, विश्वधारण समर्थ सद्गुरु महाराज जी ने सृष्टि निर्माण, राजा प्रथु, भगवान विश्वकर्मा प्राकट्य कथा उत्सव के बारे में बताया। महाराज जी ने कहा कि ब्रह्मा को विष्णु और शिव के साथ त्रिमूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
ब्रह्मा को सृष्टि की रचना का पहला देवता माना जाता है, जो जल से निकले कमल पर विराजमान हैं। ब्रह्मा ने जल में एक विशाल अंड का निर्माण किया, जिसमें सदाशिव ने अपनी चेतना प्रवाहित की। इसी चेतना से विभिन्न अंग उत्पन्न हुए और उन्होंने संपूर्ण पृथ्वी को आवृत कर लिया। महाराज जी ने कहा कि श्री विश्वकर्मा इस सृष्टि के इंजीनियर माने जाते हैं जिन्होंने निर्माण के कार्य किये है ? जब यह सृष्टि का सर्जन निर्माण हुआ जब से विश्वकर्मा इस कार्य के सुत्रधार माने गये है। जब से आज वर्तमान हमारे काम में आने वाले सभी संसाधन जैसे मकान, बंगला, फर्निचर, टेबल, कुर्सी, पलंग, डाइनिंग, सोफ़ा, बाग, गार्डन, सडक़ें और कृषि यंत्र हल से लेकर अन्न उगाने के जितने भी साधन है यह सब विश्वकर्मा की देन है।
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कथा के तीसरे दिन दयानन्द वत्स सेक्टर-23, रमेश पांचाल बल्लभगढ़, सतबीर पांचाल जाजरू, ओमप्रकाश पांचाल बल्लभगढ़, अशोक प्रधान, अतर सिंह पांचाल, रामकिशन पांचाल, जितेन्द्र पांचाल सेक्टर-23, राजू यधुवंशी, खिल्लन पांचाल, ललित वत्स, पवन पांचाल, योगेश पांचाल उर्फ राजू, विकास पांचाल, अमित पांचाल, तरूण पांचाल, टोनी पांचाल, मोनिका पांचाल, सुमन पांचाल, सुमन धारूहेड़ा आदि मौजूद रहे।
