फरीदाबाद से वन्यजीव अंगों की तस्करी करने वाला गिरफ्तार
इंद्रजाल और हाथाजोड़ी देख सकते में आई पुलिस
फरीदाबाद। वन्य प्राणी विभाग को वन्य जीवों की तस्करी करने के मामले में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। वभिाग ने छापा मारकर पुलिस की मदद से सेक्टर-आठ स्थित एक मकान से वन्य प्राणियों के उत्पाद (अंग) बरामद किए हैं। टीम ने उत्पादों को बरामद करके अपने कब्जे में ले लिया है। छापे में बरामद मोबाइल में मिले कॉटेक्ट नंबर्स के आधार पर पुलिस अन्य तस्करों को पकडऩे की योजना बना रही है।
इस सबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसी ने वन्य प्राणी विभाग के निरीक्षक कृष्ण कुमार को सूचना दी थी कि सेक्टर-आठ स्थित मकान नंबर 1887 में यज्ञदत्त नामक व्यक्ति के पास वन्य प्राणियों के उत्पाद हैं। वह इन उत्पादों को कहां से लेकर आता है, यह तो उसे नहीं पता था। मगर उसने बताया क ियज्ञदत्त इन उत्पादों को बेचकर रुपये कमाता है।
वन्य प्राणयिों के उत्पादों को बेचना जुर्म है। इस सूचना के बाद वन्य प्राणी निरीक्षक कृष्ण कुमार ने अपनी टीम गठित की। इस टीम में वन्य जीव रक्षक हंसराज, विशेषज्ञ सहायक लक्ष्मण, वन रक्षक आमिर खान, वन रक्षक दरोगा संदीप, ड्राइवर राकेश, एक महिला पुलिसकर्मी हवलदार भगवानी व अन्य पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया। टीम ने मकान में छापा मारा तो उनके होश उड़ गए। जांच टीम ने मकान में रह रहे यज्ञदत्त के पास से पांच इंद्रजाल (समुद्री पौधा कोरल), तीन हाथाजोड़ी और एक मोबाइल फोन बरामद किया।
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बता दें कि ये दोनों वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत प्रतिबंधित हैं। इसका व्यापार करने वाले के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर दिया गया है। यज्ञदत्त के मोबाइल में कई ऐसे लोगों का पता चला है जनिसे वह वन्य प्राणी उत्पाद खरीदता और बेचता था। इस मामले में थाना सेक्टर-आठ की पुलिस ने आरोपित यज्ञदत्त के खिलाफ वन्य प्राणी सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फिलहाल, पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार करके उसे जमानत पर छोड़ दिया है। वहीं, बरामद अंगों को जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। वन्य प्राणी के अंगों को बेचने का कारोबार बहुत पुराना है। वन्य जीवों के अंगों को ही उत्पाद कहा जाता है। इनमें से एक होता है इंद्रजाल। वन्य जीव के अंग ‘इंद्रजाल’ का अर्थ होता है वन्यजीवों के अंगों (जैसे कि दांत, नाखून, या अन्य शरीर के अंग) का उपयोग करके बनाया गया इंद्रजाल।
वहीं, समुद्री पौधा कोरल को भी इंद्रजाल कहते हैं। यह एक प्रकार का तांत्रिक या जादुई उपकरण माना जाता है, जिसका उपयोग कुछ लोग तंत्र-मंत्र और गुप्त आध्यात्मिक कार्यों में करते हैं। इसके अलावा, ‘हाथाजोड़ी’ (गोह के शरीर का एक अंग) भी वन्यजीवों से संबंधित वस्तु है, जिसका उपयोग तंत्र-विद्या में किया जाता है।
