जीवन में प्रकाश एवं जिम्मेदारी का पर्व है मकर संक्रांति : स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य

श्री सिद्धदाता आश्रम की ओर से जरूरतमंदों में जरूरत का सामान वितरित

फरीदाबाद। आज मकर संक्रांति के अवसर पर श्री सिद्धार्थ आश्रम में जरूरतमंदों को जरूरी सामान वितरित किया गया इस अवसर पर आश्रम के अधिपति जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तम आचार्य जी महाराज ने कहा कि मकर संक्रांति प्रकाश और जिम्मेदारी का पर्व है। श्री गुरु महाराज के निर्देश पर आज संक्रांति के अवसर पर डिलाइट फॉरएवर के पास झुग्गियों में रहने वाले लोगों को आश्रम बुलाया गया और उन्हें ससम्मान भोजन करवाकर दाल, आटा, सरसों तेल, चीनी, कंबल, जुराब, टोपी, मूंगफली और गजक के पैकेट आशीर्वाद स्वरूप दिए गए। इस अवसर पर स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य ने कहा कि माघ मास में सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है,   इससे सूर्य उत्तरायण होते हैं। जिसे सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों को विशेष महत्व दिया जाता है। जीवन में इसी सकारात्मक क्रांति को मकर संक्रांति का नाम दिया गया है। उन्होंने बताया कि पवित्र गंगा नदी का भी इसी दिन धरती पर अवतरण हुआ था और मान्यतानुसार भगवान श्रीहरि विष्णु ने असुरों का अंत कर उनके सिरों को मंदार पर्वत में दबाकर युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। इसलिए भी मकर संक्रांति के दिन को बुराइयों और नकारात्मकता को समाप्त करने के रूप में मनाते हैं। स्वामीजी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी उत्तरायण काल में पृथ्वी के प्रकाशमय होने की बात कही है। उन्होंने तो यहां तक कहा है कि इस काल खंड में शरीर त्यागने वाली आत्म का पुनर्जन्म नहीं होता है और ऐसे लोग मुक्ति प्राप्त करते हैं।

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