समाज निर्माण में न्याय और राष्ट्रवाद का सामंजस्य आवश्यक है : दीपक ठकराल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष व पंच परिवर्तन की समाज निर्माण में भूमिका संगोष्ठी संपन्न

फरीदाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रविवार को नागरिक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष व पंच परिवर्तन की समाज निर्माण में भूमिका’ रहा। गोष्ठी में क्षेत्र के अनेक प्रबुद्ध जन, गणमान्य नागरिक और स्वयंसेवक उपस्थित रहे, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण के इस मिशन में अपनी सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया। सेक्टर-3 स्थित सामुदायिक भवन में संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित विचार गोष्ठी में आईएमटी अध्यक्ष एवं उद्योगपति हेमंत कुमार शर्मा ने अपने उद्बोधन में  ‘पंच परिवर्तन’ के लक्ष्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उसके उपरांत मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक ठकराल ने कहा कि संघ की 100 वर्षों की यात्रा राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाने का संकल्प है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज निर्माण में न्याय और राष्ट्रवाद का सामंजस्य आवश्यक है। उनके अनुसार, शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने का समय है।

स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक सत्येंद्र सोरोत ने ‘पंच परिवर्तन’ के अंतर्गत सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य की महत्ता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि समाज निर्माण के लिए स्वदेशी को अपनाना और कुटुंब प्रबोधन को सुदृढ़ करना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि ये पांच परिवर्तन ही आने वाले समय में भारत को वैश्विक मंच पर एक सशक्त मार्गदर्शक के रूप में स्थापित करेंगे। कार्यक्रम में प्रो.पवन सिंह, डॉ. जगदीश चौधरी, विजय, सुनील मित्तल, उदयवीर ने भी अपने विचार प्रकट किए। रेनू आर्य ने मंच संचालन किया। समारोह स्थल पर प्रचार विभाग द्वारा लगाई गई स्टॉल पर उपलब्ध साहित्य सामग्री का भी अवलोकन किया गया। संगोष्ठी के उपरांत लोगों ने स्टॉल पर देश भक्ति एवं राष्ट्रप्रेम को समर्पित पाठ्य सामग्री से ओतप्रोत पुस्तकों की भी खूब खरीदारी की। इस आयोजन में विजयपाल और संजय का विशेष सहयोग रहा।

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