सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र दे रहा है बच्चों को शास्त्रीय संगीत के साथ साथ आध्यात्मिक ज्ञान : आर. पी. हंस
‘उभरते आर्टिस्ट’प्रतियोगिता में बच्चों की प्रतिभा ने पेश किया कला व संगीत का अनौखा उदाहरण
फरीदाबाद। सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र द्वारा आयोजित बहुप्रतीक्षित संगीत एवं कला प्रतियोगिता ‘उभरते आर्टिस्ट’ का भव्य आयोजन अत्यंत उत्साह, अनुशासन एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन में 7 से 12 वर्ष तथा 12 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों ने संगीत, नृत्य, वादन एवं चित्रकला के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा का शानदार और सराहनीय प्रदर्शन किया। यह भव्य प्रतियोगिता सतयुग दर्शन ट्रस्ट के तत्वावधान में संचालित सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र द्वारा आयोजित की गई। उल्लेखनीय है कि यह संस्था विगत 21 वर्षों से संगीत, कला एवं सांस्कृतिक शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रही है। संस्था की उत्तर भारत के अनेक शहरों में शाखाएँ संचालित हैं,
जहाँ बच्चों को संगीत एवं कला के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, संस्कारों और अनुशासन की शिक्षा भी प्रदान की जाती है। कार्यक्रम का शुभारंभ सम्माननीय मुख्य अतिथि श्रीमती अनुपमा तलवार एवं आर.पी. हंस द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। दीप प्रज्ज्वलन ने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान और प्रेरणा से भर दिया। भारतीय संस्कृति में दीप को ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है, जो इस आयोजन के उद्देश्य को भी सार्थक करता है। मुख्य अतिथियों का स्वागत संगीत कला केंद्र के प्राचार्य दीपेंद्र कांत एवं डा अरुण कुमार शर्मा ( प्राचार्य सतयुग दर्शन विद्यालय ) द्वारा गुलनारी दुपट्टा पहनाकर एवं पौधा भेंट कर किया गया। इस अभिनव स्वागत ने न केवल भारतीय संस्कृति की गरिमा को दर्शाया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश भी मंच से दिया।
यह भी पढ़ें
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने संगीत, नृत्य, वाद्ययंत्र एवं कला के माध्यम से अपनी कल्पनाशीलता, अभ्यास और आत्मविश्वास का अद्भुत परिचय दिया। हर प्रस्तुति में बच्चों की मेहनत, गुरुओं का मार्गदर्शन और कला के प्रति समर्पण स्पष्ट रूप से झलकता रहा। पूरे सभागार में सुर, ताल, भाव-भंगिमा और रंगों का ऐसा सुंदर संगम देखने को मिला जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आत्मा की भाषा है, जो मनुष्य को अनुशासन, संवेदनशीलता और संस्कारों से जोड़ता है। संगीत और कला में वह शक्ति है जो सीमाओं से परे जाकर दिलों को जोड़ती है और समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है।
इस भव्य आयोजन के अंतर्गत चार प्रमुख प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जिनमें बच्चों ने बढ़-चढक़र भाग लिया, सभी विजेताओं को ट्राफी सर्टिफिकेट आदि से सम्मानित किया। सभी प्रस्तुतियों का निर्णायक मंडल द्वारा निष्पक्ष, सूक्ष्म एवं पारदर्शी मूल्यांकन किया गया, निर्णायक मंडल में भारत के सुप्रसिद्ध वायलिन वादक मिस्टर शुभम सरकार एवं डा नीरा श्रीवास्तव (गायन), मिस पूजा पाठक (कत्थक नृत्यांगना ), मिस दिशा हर्ष (भरतनाट्यम नृत्यांगना), मिस्टर छोटे लाल (कला विभाग) ने निर्णायक मंडल का कार्यभार बखूबी निभाया। प्रतियोगिता के समापन पर विजेता प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि एवं निर्णायकगण द्वारा पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। बच्चों की मेहनत, आत्मविश्वास और मंचीय प्रस्तुति की सभी अतिथियों एवं दर्शकों ने मुक्त कंठ से सराहना की।
मुख्य अतिथि ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि कला और संगीत बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे मंच बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखते हैं और उन्हें आत्मविश्वासी नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों की छिपी प्रतिभा को पहचानना, उन्हें मंच प्रदान करना तथा नई पीढ़ी को संगीत एवं कला के प्रति प्रेरित करना रहा। अभिभावकों एवं दर्शकों की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को और भी सफल एवं स्मरणीय बना दिया। कार्यक्रम के अंत में सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र द्वारा यह संकल्प व्यक्त किया गया कि भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक एवं रचनात्मक आयोजनों का निरंतर आयोजन किया जाता रहेगा, ताकि बच्चों की प्रतिभा को सही दिशा और मंच मिलता रहे।
