सूरजकुंड मेले में पहली बार ट्रांसजेंडर कम्युनिटी की लगी स्टॉल

मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट के बैनर तले तीन हस्तशिल्पियों को मौका

फरीदाबाद। सूरजकुंड में चल रहे 39वें इंटरनेशनल क्राफ्ट मेले में पहली बार ट्रांसजेंडर कम्युनिटी से आये कलाकारों को स्टॉल लगाने का मौका दिया गया है। मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट एंड इंटरप्रीन्यूरोशिप (एमएसडीई) के बैनर तले तीन हस्तशिल्पियों को मौका मिला है, सभी दिल्ली के रहने वाले है। मेला में पहली बार आकर वो बेहद खुश है, उनका मानना है कि वो भी सम्मान के हकदार है और उसी हक के लिए वो मेहनत कर रहे है। मेले में स्टॉल नंबर 645 पर अपना सामान बेच रही ट्रांसजेंडर राशी साहू ने बाताया कि उन्होंने केवल 12वीं तक की पढ़ाई की। साल 2024 में वो इस लाइन से जुड़ी और निशब्द एनजीओं के जरिए उसने काम सीखा। जिसके बाद उन्होंने खुद से सामान बनाना सीख लिया।

इसके बार उन्होंने अपनी कम्युनिटी के लिए एक एनजीओ बनाया, जिसको वो तीन लोग मिलकर चला रहे है। इसमें वो अपनी कम्युनिटी के लोगों को बिना किसी शुल्क के काम सीखाते है। राशी साहू ने बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट एंड इंटरप्रीन्यूरोशिप (एमएसडीई) से जुडऩे के बाद उनके जरिए स्टॉल लगाने का मौका मिला है। यहां पर वो हाथों से तैयार की गई, कांच की ज्वैलरी, महिलाओं के कान, नाक और गले के आभूषण तैयार करके लेकर आए है। इसके अलावा घर सजाने के लिए इस्तेमाल होने वाला सामान भी वो हाथ से तैयार करके लेकर आए है। नार्थ दिल्ली की रहने वाली एनी सैफी ने बताया कि वो 8वीं पास है। उनके पिता एक कार पेंटर का काम करते है।

एक ट्रांसजेंडर का जीवन बेहद ही कठिन होता है। उन्होंने केवल 8वीं तक की पढ़ाई की है। कुछ ही महीने पहले उसने मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट एंड इंटरप्रीन्यूरोशिप से 15 दिन का कोर्स किया। जिसके बाद उन्होंने अपने हूनर को पहचाना। मेला में वो फूलों से तैयार होने वाले लॉकेट और दूसरा सामान लेकर आए है। हम फूल पत्ती को ज्वैलरी के अंदर फिक्स कर देते है। जिससे वो यादगार के तौर पर रह जाता है। वो पहली बार मेले में आये और उनके बनाए हुए उत्पाद लोगों को बेहज पसंद आ रहे है।

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