एलपीजी आपूर्ति बाधित होने से सस्ती थाली उपलब्ध कराने वाली 20 संस्थाओं के समक्ष गहराया संकट

फरीदाबाद। एलपीजी गैस की आपूर्ति में रूकावट पैदा होने से शहर में जरूरतमंद लोगों को सस्ती थाली उपलब्ध करवाने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं के सामने भी संकट पैदा हो गया है। शहर में अलग-अलग जगहों पर 20 से अधिक संस्थाएं पांच हजार से अधिक लोगों को प्रतिदिन 10 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध करवाती है। इन जगहों पर अधिकतर फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिक खाना खाने के लिए आते हैं। हालांकि अभी तक किसी भी संस्था ने अपनी रसोई को बंद नहीं किया है।

लेकिन गैस आपूर्ति की किल्लत लंबी चली तो स्थिति खराब हो सकती है। एनआइटी में दौलतराम धर्मशाला के सामने सीता की रसोई चलाने वाले महेंद्र बताते हैं कि उनके यहां पर प्रतिदिन 700 से 800 लोग खाना खाने के लिए आते हैं। वह सभी को 10 रुपये में थाली देते है। अभी तो संस्था के सदस्यों के सहयोग से एक दूसरे का सिलिंडर लेकर रसोई का काम चल रहा है। लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना मुश्किल है।

वह कहते हैं कि उनका एक सिलिंडर 15 से 20 दिन चलता है। हालात से निपटने के लिए दूसरे विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं। सेक्टर-22 श्मशान घाट के पास सस्ते थाली की रसोई चलाने वाले सीके राय बताते हैं कि अभी तक तो किसी तरह का संकट पैदा नहीं हुआ है। लोगों के सहयोग से उनकी रसोई सही चल रही है।

हालांकि सिलिंडर आपूर्ति की सप्लाई पूरी तरह से नियमित नहीं हुई तो स्थिति खराब हो सकती है। उनके यहां पर प्रतिदिन एक हजार लोग खाना खाने के लिए आते हैं। सिलिंडर के संकट को देखते हुए बल्लभगढ़ अनाज मंडी में चलने वाली अटल कैंटीन के प्रबंधकों ने दूसरे विकल्पों को तलाश लिया है। कैंटीन संचालकों का कहना हैं कि उन्होंने पांच बड़े इंडेक्शन चूल्हे ले लिए हैं।

सिलिंडर का संकट भविष्य में होता है तो चूल्हों पर ही खाना बनाया जाएगा। इसके साथ ही एनआइटी-3 स्थित ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की कैंटीन में इन दिनों भोजन उपलब्ध न होने से मरीजों, उनके तीमारदारों तथा अस्पताल के डाक्टरों और कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गैस की कमी के कारण कैंटीन में नियमित रूप से खाना तैयार नहीं हो पा रहा है, जिससे लोगों को मजबूरी में रेडीमेड खाद्य पदार्थों से ही काम चलाना पड़ रहा है।

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