जे.सी. बोस विवि में राष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज: डिजिटल युग में मीडिया की विश्वसनीयता और भारतीय मूल्यों पर मंथन

फरीदाबाद। जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (वाईएमसीए) के संचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘डिजिटल युग में मीडिया, समाज और सार्वजनिक विमर्श’ का मंगलवार आज भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राघवेंद्र पी. तिवारी, विशिष्ट अतिथि पद्मश्री आलोक मेहता और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव कुमार द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण की पहल करते हुए ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ का प्रयोग न करने का संकल्प भी लिया गया।

तथ्यों की सत्यता और जवाबदेही सबसे बड़ी चुनौती: आलोक मेहता
मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री आलोक मेहता ने पत्रकारिता के वर्तमान परिदृश्य पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर में सत्य, तथ्य और विश्वसनीयता को बनाए रखना सबसे कठिन है। उन्होंने युवा पीढ़ी को संदेश दिया कि देश का भविष्य उनके हाथों में है, इसलिए उन्हें केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि कौशलयुक्त और जागरूक नागरिक बनना होगा। कुलपति प्रो. राजीव कुमार ने मीडिया को लोकतंत्र का सशक्त प्रहरी बताया और डिजिटल युग में विश्वसनीयता के संकट पर चिंता जताई।

भारतीय मूल्यों और सकारात्मक विमर्श पर जोर
मुख्य अतिथि प्रो. राघवेंद्र पी. तिवारी ने गीता के संदेश को विश्व का श्रेष्ठ संचार उदाहरण बताते हुए कहा कि युवाओं को पश्चिमी मीडिया द्वारा भारत की छवि धूमिल करने वाले नकारात्मक नैरेटिव का मुकाबला करना चाहिए। डीन प्रो. अतुल मिश्रा ने कहा कि डिजिटल युग में तथ्यों की प्रामाणिकता बनाए रखना भविष्य की मुख्य चुनौती है। विभागाध्यक्ष प्रो. पवन सिंह ने बताया कि सम्मेलन के लिए देशभर से 350 शोध लेख प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 150 चयनित पत्रों का वाचन 10 विभिन्न सत्रों में किया जाएगा।

“डिजिटल कम्युनिकेशन” और सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन हुआ
इस अवसर पर प्रो. पवन सिंह द्वारा संपादित पुस्तक “डिजिटल कम्युनिकेशन” और सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन किया गया। कुलपति प्रो. राजीव कुमार ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। प्रो. अनुराधा शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा और राष्ट्रगान के साथ प्रथम दिन के सत्र का समापन हुआ।

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