भारतीय ज्ञान परंपरा के सिद्धांतों को जीवन मे अपनाए : प्रो. काशीनाथ

आज श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के दर्शनसंकायान्तर्गत- योग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन प्रात: 8:30 से सायं 5 बजे तक महिला अध्यन केंद समिति कक्ष मे किया गया। जिसका विषय “भारतीय ज्ञान परंपरा में योग शास्त्र का अवदान” (योग शास्त्रीय सिद्धांतों, योग पद्धतियों एवं योग सम्बन्धी चिकित्सा पद्धतियों का विवेचन) महिला अध्यन केंद समिति कक्ष मे किया गया।

यह कार्यक्रम के माननीय कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक के निर्देशन मे सम्पन्न हुआ, कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. ए. एस. आरवमुदन, पीठप्रमुख-दर्शन संकाय ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) काशीनाथ समागंडी, निदेशक- मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान नई दिल्ली ने अपने वक्तव्य मे कहा की भारतीय ज्ञान परंपरा के सिद्धांतों को हमें अपने जीवन मे उतरने की आवश्यकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा में अनेक ग्रंथों में अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन किया गया है योग में यम, नियम- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वरपरिधान तथा आयुर्वेद में हितभूक, ऋतभूक और मितभूक का सिद्धांत है जिसमें कब, क्या और कैसे खाएं कितना खाएं, सोना, जगना, उठना बैठना और आप का व्यवहार आदि के अनेक सिद्धांत है इनको यदि हम जीवन में पालन करते हैं तो एक बालक समाज के लिए सुसंस्कृत चरित्रवान स्वस्थ नागरिक के रूप में परिणत होता है जिससे छात्रों का सर्मांगीण विकास होगा ।

मुख्य वक्ता के रूप मे प्रो. ईश्वर भारद्वाज, पूर्व शैक्षणिक डीन, गुरुकुल कंगडी विश्वविद्यालय, हरिद्वार रहें उन्होंने अपने वक्तव्य मे कहा
भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व की सर्वाधिक श्रेष्ठ ज्ञान परंपराओं में से एक है और यह सबसे प्राचीन और समृद्ध ज्ञान परंपरा है इसके सिद्धांतों को हमें जन-जन तक पहुंचना चाहिए जिससे पूरा विश्व एक परिवार “वसुधैव कुटुंबकम” की तरह रह सके सुख शांति और आनंद के साथ जीवन जीने के लिए इस ज्ञान परंपरा का आत्मसात करना अत्यंत आवश्यक है । विशिष्ट वक्ता – डॉ. निधेश कुमार यादव, सहाचार्य, शुलिनी वि. वि. सोलन हिमाचल, प्रो. नारायण प्रकाश गिरी, योग विभाग- ओम स्टा. ग्लो. वि.वि., विशिष्ट वक्ता -डॉ. सत्येन्द्र मिश्र योग विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय इत्यादि सत्रानुसार लगभग 40 विद्वानों ने अपने विचार एवं शोध पत्र प्रस्तुत किए है।

तथा संगोष्ठी संयोजक प्रो. मार्कन्डेय नाथ तिवारी अध्यक्ष सांख्य एवं योग विज्ञान विभाग ने संगोष्ठी के प्रारंभ में सभी का वाचिक एवं पुष्पमाला शाँल द्वारा स्वागत किया,संगोष्ठी के सह-संयोजक- डॉ. रमेश कुमार, समन्वयक- योग विज्ञान विभाग रहे , संगोष्टी के समापन मे डॉ. नवदीप जोशी द्वारा सभी का धन्यवाद किया गया ।
इस कार्यक्रम मे लगभग 200 शोधार्थी छात्रों ने अपना शोध पत्रवचन किया तथा लगभग 100 शोधार्थी छात्रों ने ऑनलाइन भाग लिया जिसमे भारतीय ज्ञान परंपरा के अनेक विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए ।

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