श्री सिद्धदाता आश्रम में माता चंद्रघंटा स्वरुप की पूजा में दिखा भक्ति और तप का आध्यात्मिक संगम

फरीदाबाद। ज्या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्। सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥ ऐसे ही सप्तशती और देवी पुराण के मंत्रों के साथ चैत्र नवरात्रि पर्व के तीसरे दिन सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण दिव्यधाम-श्रीसिद्धदाता आश्रम के सत्संग भवन में चल रहे आदिशक्ति मां दुर्गा के अनुष्ठान में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने आदिशक्ति मां दुर्गा के तृतीय स्वरुप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की।

वेदवेदांग आचार्यो द्वारा किए गए देवी पुराण महाभागवत के मंत्रोच्चार के साथ युवाचार्य स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी ने विश्व कल्याण की विशेष-पूजा-अर्चना की। आयोजित अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने सौभाग्य, स्मृद्धि, साहस और संकल्प शक्ति की प्राप्ति के लिए मां चंद्रघंटा स्वरुप की पूजा की । श्रीसिद्धदाता आश्रम के अधिष्ठाता एवं श्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थ पीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा के पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने विशेष पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को अपने प्रवचन में आदिशक्ति मां दुर्गा के तृतीय स्वरुप मां चंद्रघंटा की कथा में प्रस्तुत किया कि माता चंद्रघंटा को शक्ति की वाग्देवी कहा गया है। माता चंद्रघंटा की कृपा से श्रद्धालुओं के पाप और संकट नष्ट हो जाते हैं।

माता चंद्रघंटा की पूजा से जीवन में शांति मिलती है और मनुष्य के कष्टों का निवारण होता है। माता चंद्रघंटा सौभाग्य, धन-धान्य,साहस, सुख-संपत्ति,समृद्धि, संकल्प शक्ति और मुक्ति का आशीर्वाद  प्रदान करती है। मां चंद्रघंटा की पूजा करने से आंतरिक शक्ति जागृत होती है, जो एकाग्रता में वृद्धि और प्रगति में बाधा डालने वाली रुकावटें दूर होती हैं। चैत्र नवरात्रि का पहला दिन संकल्प तय करने, दूसरा दिन अनुशासन में रहने और तीसरा दिन आत्मविश्वास के साथ संकल्प शक्ति को प्रगाढ़ करना चाहिए। श्रद्धालुओं ने आदिशक्ति मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा देवी की मंत्रों की गूंज के बीच पूजा-अर्चना की। स्वामी जी महाराज ने भक्तों को प्रसाद और आशीर्वाद प्रदान किया।

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