राम नवमी यज्ञ महोत्सव में शास्त्रविहित युक्तियों के अनुसरण द्वारा जीवनोद्धार करने का संदेश
फरीदाबाद। सतयुग दर्शन वसुन्धरा में आयोजित रामनवमी यज्ञ-महोत्सव में तीसरे दिन विभिन्न प्रांतों व विदेशों से असंख्य श्रद्धालुओं का आना जारी रहा। आज हवन आयोजन के उपरांत सत्संग में नीति अनुसार सजन श्री शहनशाह हनुमान जी के पावन जन्मोत्सव को श्रद्धा एवं उत्साह के साथ बड़े ही प्रेरणादायक ढंग से मनाया गया। इस अवसर पर सत्संग के माध्यम से सजनों को सजन श्री शहनशाह हनुमान जी की महिमा एवं उनके द्वारा प्रदत्त जीवनोपयोगी युक्तियों को अपनाने की महत्ता पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला गया। इसी क्रम में सजन श्री शहनशाह महाबीर जी की सतवस्तु के कुदरती ग्रंथ में वर्णित जीवनदायी युक्तियों को सच्चे दिल से स्वीकार करने हेतु सजनों को प्रेरित किया गया कि वे, उनके द्वारा दर्शाए निष्कंटक मार्ग पर दृढ़ता से चलें व जीवन उद्धार करें।
साथ ही यह भी समझाया गया कि उनके द्वारा बताये गए मार्ग का अनुसरण करने से मनुष्य काम, क्रोध, लोभ, मोह एवं अहंकार जैसे विकारों से मुक्त होकर सम, संतोष, धैर्य, सच्चाई एवं धर्म जैसे स्थायी गुणों को धारण करता है और अपने मन-मस्तिष्क को एकाग्र एवं स्थिर अवस्था में साधे रखने में सफल हो पाता है। सत्संग में यह भाव भी व्यक्त किया गया कि जो साधक सजन श्री शहनशाह हनुमान जी की महिमा एवं उनकी युक्तियों को सहर्ष स्वीकार करता है, वही आत्मपद को प्राप्त कर कालातीत अवस्था को प्राप्त हो आत्मलीन हो जाता है। आगे उनकी अपरम्पार महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया कि सजन श्री शहनशाह हनुमान जी की अकथनीय, अवर्णनीय उपमा करने में ऋषि-मुनि भी असमर्थ रहे हैं। वे चार वेद एवं छ: शास्त्रों के ज्ञाता तथा कुदरती विज्ञान के श्रेष्ठतम विद्वान हैं।
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उनकी कृपा से साधक को आत्मसाक्षात्कार का अनुभव होता है तथा वह अपने इष्ट से मिलकर ज्योति स्वरूप का दर्शन कर सकता है। वे ही समभाव-समदृष्टि की युक्ति प्रदान कर, शब्द गुरु का मंत्र देकर साधक के ख्याल को नित्य परमात्मा से जोडऩे वाले हैं तथा कर्मकांडमय द्वैत भाव से मुक्त कर सच्चे भक्ति मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं। बताया गया कि उनके द्वारा प्रदत्त नाम, ध्यान एवं युक्ति अतुलनीय है, जिसके माध्यम से वे अपने भक्तों को अजर-अमर अवस्था का अनुभव कराते हैं, मृत्यु के भय से मुक्त करते हैं तथा समस्त विकारों, संकल्प-विकल्पों एवं द्वैत भाव को समाप्त कर आत्मपद के मार्ग पर प्रशस्त करते हैं।
सजन श्री शहनशाह हनुमान जी को वैद्यों के वैद्य बताते हुए कहा गया कि वे तीनों तापों का नाश कर, मनुष्य को शांति प्रदान करते हैं तथा मनमत से बचाकर गुरुमत की ओर अग्रसर करते हैं। वे ही कर्मों के बंधनों से मुक्त कर, संशयों का निवारण कर, जीवन में स्थिरता एवं संतुलन स्थापित करते हैं। उनकी महिमा का वर्णन करते हुए यह भी बताया गया कि वे भक्त शिरोमणि हैं, जिन्होंने युग युगान्तरों में धर्म की स्थापना हेतु अद्वितीय योगदान दिया है। प्रत्येक युग में उन्होंने अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना की तथा मानवता के लिए आदर्श प्रस्तुत किया।
वे ही सुमति के दाता, संकटों के नाशक एवं अपने शरणागतों के रक्षक हैं, जो दुखों का निवारण कर जीवन को सुखमय बनाते हैं। अंत में यह बताया गया कि अजरता और अमरता के प्रतीक सजन श्री शहनशाह हनुमान जी ही दिव्य गुणों की खान हैं—वे सबसे श्रेष्ठ, सबसे विद्वान्, सबसे गुणवान, सबसे बलवान, सबसे धनवान, सबसे बुद्धिमान व सारी दुनिया में ज्ञानवान हैं। वे भक्तों में श्रेष्ठ, भक्ति-शक्ति के अधिष्ठाता एवं समभाव-समदृष्टि के प्रतीक हैं। इसलिए सबको प्रेरित किया गया कि वे उनके शास्त्रविहित वचनों को हृदय से स्वीकार कर, समर्पित भाव से उनकी चरण-शरण में रहते हुए उनके दिखाए सदमार्ग पर चलें व अपने जीवन का विशेष लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करने में सफल हो जाए।
