अब कचरा सफाई के नाम पर अधिकारी नहीं घुमा सकेंगे बजट, निगम को देना होगा हिसाब
फरीदाबाद। शहर में स्वच्छता अभियान के नाम पर निगम की ओर से हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा किया जाता हैं। लेकिन शहर फिर भी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाता है। निगम जो स्वच्छता के नाम पर अपने बजट में राशि जारी करता है। उसको भी पूरी तरह से खर्च कर देता हैं। पार्षदों की शिकायत रहती है कि उनको वार्ड में सफाई के लिए जो संसाधन चाहिए होते हैं। वह उपलब्ध ही नहीं कराए जाते हैं। हर साल सफाई पर खर्च किए जाने वाला बजट भी बढ़ा दिया जाता है।
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ऐसे में कचरा सफाई के नाम पर खजाना खाली नहीं हो। इसको लेकर अधिकारियों को अब पाई पाई का हिसाब देना होगा। हाल में सदन की बजट बैठक में विधायकों की मांग पर केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर की ओर से यह निर्देश जारी किए गए। प्रत्येक मासिक रिपोर्ट में बताना होगा कि कहां कहां पर बजट खर्च किया गया। निगम हर माह तीन हजार सफाई कर्मचारियों पर 12 करोड़ रुपये वेतन के रूप में खर्च कर रहा है। इसके साथ ही निगम की ओर से रात्रि सफाई अभियान के लिए एजेंसी को सात करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं। निगम में सफाई कर्मचारियों की संख्या तीन हजार है। जिसमें से 1500-1500 स्थाई और अस्थाई कर्मचारी शामिल है।
इसके साथ ही सफाई को लेकर एक विशेष अधिकारी और स्वास्थ्य अधिकारी शामिल है निगम की ओर से स्वच्छता का बजट 42 से बढ़ाकर सीधा 167 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसमें अब निगम में स्वच्छता अभियान से जुड़े अधिकारियों को रिपोर्ट बनानी होगी कि किस वार्ड में कितना रुपये खर्च किया गया। यह मासिक रिपोर्ट सरकार को भी भेजी जाएगी। निगमायुक्त धीरेंद्र खडग़टा का कहना है कि स्वच्छता को लेकर जो भी बजट जारी किया जाता है। उसका पूरा प्रयोग सफाई से जुड़े कामों में होता है। इसकी रिपोर्ट भी पहले से ही तैयार होती है। भविष्य में इसको पार्षद और विधायक के साथ भी सांझा किया जाएगा।
