मजदूरों की वेतन बढ़ोतरी के शांतिपूर्ण आंदोलन के खिलाफ पुलिस दमन समझ से बाहर : ई.करीम
वेतन बढ़ौतरी की मांग का संबंध कारखाना मालिकों और श्रम विभाग व प्रशासन का, पुलिस दमन करे बंद
फरीदाबाद। मजदूर अपने जिन्दा रहने के लिए वेतन बढ़ौतरी सहित कानूनी अधिकारों की ही मांग कर रहे हैं। इसमें साजिश दिखाना पूंजीपतियों के हित में आंदोलन को बदनाम करना और दमन करने की सरकार की रणनीति है। इसे किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उक्त बात सीटू राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व सांसद एलम राम करीम ने मजदूरों से मिलने के बाद मेगपाई में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कही। प्रेस कांफ्रेंस में सीटू की राष्ट्रीय सचिव ए आर सिंधु, प्रदेश महासचिव जयभगवान, अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा, सीटू जिला प्रधान निरंतर पराशर, सचिव वीरेंद्र डंगवाल, उपाध्यक्ष रवि कुमार, नरेश सोलंकी भी इस अवसर पर मौजूद थे। मजदूर नेताओं ने कहा को बड़े शर्म की बात है कि हरियाणा में घोषित न्यूनतम वेतन 15220 रुपए भी देने से बहुत से फैक्ट्री मालिक मना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरे उत्तरी भारत में मजदूरों की स्थिति गुलामों जैसी बना रखी है।
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कैजुअल व ठेका मजदूर कुल मजदूरों का करीब 80 प्रतिशत है, जिनकी हालत बेहद दयनीय है। इनमें भारी तादाद में महिलाएं हैं। ये सभी वर्तमान मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की जान है। लेकिन उन्हें न्यूनतम श्रम कानून सुविधाओं से भी बेदखल किया गया है। हमारे संविधान, सुप्रीम कोर्ट ओर श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए स्थाई प्रकृति के काम पर उक्त मजदूरों को रखा जा रहा है। हजारों फैक्ट्री ही रजिस्टर्ड नहीं हैं। मजदूरों की तो स्थिति फिर समझी जा सकती है। यह काम भाजपा की केंद्र व राज्य सरकारों के नाक के नीचे हो रहा है। मजदूर नेताओं ने कहा कि मानेसर, नोएडा सहित हाल में चले आंदोलनों में गिरफ़्तार सभी मजदूरों और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए। सभी मुक़दमे निरस्त हों।
उन्होंने कहा कि इस महंगाई में 26000 रूपये से कम वेतन में गुजारा संभव ही नहीं है। ओवर टाइम का डबल वेतन मांगना कोई कानूनी जुर्म नहीं है। भाजपा के नेतृत्व में हमारे देश के 54 करोड़ मजदूरों को देशी विदेशी बड़े कारोबारियों के लिए सस्ते श्रम के लिए परोसा जा रहा है। मुख्यमंत्री हरियाणा द्वारा मजदूरों को भगवान बताने पर टिप्पणी करते हुए सीटू नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार मजदूरों पर लाठीचार्ज कर गिरफ्तार करके जेल में डाल रही है, न्यूनतम वेतन तक नहीं दिलवा पा रही, खाना बनाने के ईंधन के अभाव में लाखों प्रवासी मजदूर अपने घरों को पलायन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन्हें इंसान ही मान ले ओर इंसानों जैसा बर्ताव मजदूरों के साथ कर ले वही बहुत है। मजदुर नेताओं ने कहा कि अपने अधिकारों के लिए मजदुर 1 मई को देश भर में सभाएं व प्रदर्शन करेंगे। फरीदाबाद की सभा बी के चौंक पर होगी।
