जे.सी.बोस विश्वविद्यालय ने मनाया 57वां स्थापना दिवस उत्सव, छात्र-शिक्षक-पूर्व छात्र हुए सम्मानित
फरीदाबाद। जे.सी.बोस विश्वविद्यालय ने मंगलवार को अपने 57वें स्थापना दिवस का भव्य और गरिमामय आयोजन किया। इस अवसर पर छात्रों, संकाय सदस्यों और पूर्व छात्रों की उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। यह संस्थान 1969 में इंडो-जर्मन वाईएमसीए इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग के रूप में स्थापित हुआ था, जिसे 2009 में विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। इस वर्ष विश्वविद्यालय के रूप में 16 और संस्थान के रूप में कुल 56 वर्ष पूरे हो गए हैं।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने की, जबकि प्रतिष्ठित पूर्व छात्र प्रो.राकेश कुमार मुद्गल, कुलपति, आत्मीय विश्वविद्यालय, राजकोट और सरदार सुखदेव सिंह, अध्यक्ष, वाईएमसीए एमओबी पूर्व छात्रसंघ भी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में कुल 17 शोध पुरस्कार, तीन स्टार पूर्व छात्र पुरस्कार, दो नवाचार पुरस्कार, तथा सामुदायिक सेवा, खेल और सांस्कृतिक-तकनीकी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छह पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अलावा, तकनीकी और सांस्कृतिक क्लबों को सर्वश्रेष्ठ क्लब पुरस्कार से सम्मानित किया गया और क्लब समन्वयकों को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उत्सव की शुरुआत आचार्य जे.सी.बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण और वृक्षारोपण अभियान के साथ हुई। शकुंतलम हॉल में छात्र क्लबों द्वारा नवाचार परियोजनाओं का प्रदर्शन किया गया। एक वृत्तचित्र के माध्यम से विश्वविद्यालय की अकादमिक यात्रा और आधुनिक सुविधाओं को दर्शाया गया।
प्रो. राकेश कुमार मुद्गल ने अपने संबोधन में कहा कि शैक्षणिक संस्थान की आत्मा उसका शिक्षण है और भौतिक संरचना उसका शरीर। उन्होंने फरीदाबाद के औद्योगिक विकास में विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना की और इसकी गौरवशाली विरासत को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया।
वाईएमसीए एमओबी के अध्यक्ष सरदार सुखदेव सिंह ने विश्वविद्यालय की तकनीकी यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने 10 हजार से अधिक पूर्व छात्रों के योगदान और टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर, छात्रवृत्ति तथा प्लेसमेंट प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने आर्थिक कारणों से फीस न दे पाने वाले छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी फीस की चिंता न करें, एसोसिएशन सहायता करेगी। कुलगुरु प्रो.राजीव कुमार ने विश्वविद्यालय के विकास में वाईएमसीए एमओबी की भूमिका की सराहना करते हुए छात्र संघ से एक प्रतिष्ठित पूर्व छात्र के नाम पर छात्रावास निर्माण में सहयोग करने का अनुरोध किया। उन्होंने वैश्विक सहयोग के लिए विदेशी चैप्टर के साथ जुड़ने की योजना और नैक ‘ए प्लस प्लस’ मान्यता प्राप्त करने की आकांक्षा भी साझा की। कार्यक्रम में छात्र क्लबों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम का समापन संकाय, पूर्व छात्रों और छात्रों के सम्मान समारोह और कुलसचिव प्रो. अजय रंगा के धन्यवाद प्रस्ताव तथा राष्ट्रगान से हुआ।
