एनपीटीआई में पांच दिवसीय ध्रुपद वर्कशॉप का सफल समापन
- शास्त्रीय संगीत मन और मस्तिष्क को एकाग्र रखता हैः हेमंत जैन
फरीदाबाद। सेक्टर-33 स्थित विद्युत मंत्रालय के राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान (एनपीटीआई) में फाउंडेशन बैच के अलग-अलग सीपीएसयूएस (एग्जीक्यूटिव ट्रेनी) के प्रशिक्षणार्थियों के लिए आयोजित पांच दिवसीय ध्रुपद वर्कशॉप का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस कार्यशाला का संचालन प्रसिद्ध ध्रुपद गायक अभिजीत सुखदाणे ने किया। एनपीटीआई के महानिदेशक हेमंत जैन के दिशा निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को राग गुणकली में ध्रुपद गायन का व्यावहारिक और सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही स्वर विस्तार, स्वर भेद, नादयोग, ध्रुपद का व्याकरण तथा भारतीय संस्कृति में शास्त्रीय संगीत की विभिन्न शैलियों के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। यह फाउंडेशन बैच डॉ. इंदु माहेश्वरी, प्रिंसिपल डायरेक्टर (ट्रेनिंग) के मार्गदर्शन और डॉ. वत्सला शर्मा, डायरेक्टर
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(ट्रेनिंग) के सहयोग में चल रहा है, इस बैच को एनपीटीआई के अधिकारीगढ कॉर्डिनेट कर रहे हैं।
इस अवसर पर महानिदेशक हेमंत जैन ने कहा कि शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति का अनमोल गहना है, जो मन और मस्तिष्क को एकाग्र अवस्था में रखने में सहायक होता है। यह हमारे संगीतकार पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है, जिसे सहेजकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ मानसिक संतुलन और सांस्कृतिक चेतना को भी सुदृढ़ करती हैं।
ध्रुपद गायक अभिजीत सुखदाणे डागर वाणी शैली के प्रतिष्ठित कलाकार हैं। उन्होंने विश्वविख्यात ध्रुपद गायक एवं गुरु उस्ताद ज़िया फरीदउद्दीन डागर से ध्रुपद की विधिवत शिक्षा प्राप्त की है। श्री सुखदाणे ने भारत के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर ध्रुपद गायन की एकल प्रस्तुतियां दी हैं और उन्हें कई सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उनके कार्य और व्यक्तित्व पर अनेक शो भी फीचर हो चुके हैं। श्री सुखदाणे के अनेक शिष्य आकाशवाणी और दूरदर्शन के ‘ए’ ग्रेड कलाकार के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। कार्यशाला के समापन पर प्रशिक्षणार्थियों ने ध्रुपद के प्रति अपनी रुचि और अनुभव साझा करते हुए एनपीटीआई प्रबंधन का आभार व्यक्त किया।
