भाजपा सरकार गरीबों के अधिकार छीनने पर आमादा : रोहित नागर

फरीदाबाद। तिगांव विधानसभा क्षेत्र से पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी रोहित नागर ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा को कमजोर करना गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण भारत के अधिकारों पर सीधा हमला है।  उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के दावों के बीच ज़मीनी सच्चाई यह है कि लोगों के हाथों से काम छीना जा रहा है, और रोजगार की गारंटी को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है। मनरेगा के माध्यम से कांग्रेस ने गरीबों को न्यूनतम मजदूरी की कानूनी गारंटी दी थी, लेकिन भाजपा सरकार नियमों और प्रक्रियाओं में बदलाव कर इस गारंटी को खत्म करने का ताना-बाना बुन रही है। यह पूरी तरह गरीब-विरोधी सोच का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा कमजोर हुई तो इसका सीधा असर ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और महिलाओं पर पड़ेगा, जिसे कांग्रेस कभी स्वीकार नहीं करेगी। रोहित नागर बुधवार को तिगांव क्षेत्र में मनरेगा बचाओ संघर्ष अभियान के तहत लोगों को जागरूक कर रहे थे।

इस मौके पर उनका ग्रामवासियों द्वारा फूलमालाओं से जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर उनके साथ तिगांव विधानसभा अध्यक्ष पंकज सिंह, विजय ठेकेदार, विजय बिदूडी, रोहताश चौधरी, हामिद खान आदि अनेकों मुख्यरूप से मौजूद थे। तिगांव विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रोहित नागर ने कहा कि राष्टपिता महात्मा गांधी का सपना गांवों को आत्मनिर्भर बनाने का था और मनरेगा उसी सोच का सशक्त माध्यम था लेकिन आज भाजपा सरकार द्वारा गांव, गरीब, किसान और मजदूर विरोधी नीतियों के चलते मनरेगा जैसे काम के अधिकार पर हमला किया जा रहा है तथा महात्मा गांधी के नाम को हटाने की सोच भी उसी मानसिकता को दर्शाती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस गरीबों, मजदूरों और ग्रामीणों के अधिकारों की इस लड़ाई को पूरी मजबूती के साथ लड़ेगी और मनरेगा को खत्म करने या कमजोर करने की किसी भी कोशिश को लोकतांत्रिक तरीके से रोका जाएगा। क्योंकि इस नए नियम में भाजपा मजदूरों के काम करने के संवैधानिक अधिकार को छीन रही है। जबकि कांग्रेस हर परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के काम की कानूनी गारंटी मिलती थी। हर गांव में काम की कानूनी गारंटी दी जाती थी। भाजपा के नए प्रावधान में अब पंचायत के पास कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी। काम केवल मोदी सरकार द्वारा चुने गए गांवों में ही मिलेगा। हम मनरेगा को कमजोर करने या खत्म करने के हर प्रयास का डटकर विरोध करते रहेंगे और गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।

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