सूरजकुंड शिल्प महोत्सव-2026 में हास्य कवि सम्मेलन ने बांधा समां

कवि सम्मेलन में प्रेम, समाज और व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य, श्रोताओं ने तालियों से किया स्वागत

फरीदाबाद। 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव-2026 के अंतर्गत गत मंगलवार रात्रि मुख्य चौपाल पर भव्य हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सीईओ एफएमडीए गौरी मिड्ढा मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री योगिता चौहान द्वारा माँ सरस्वती की वंदना ‘साधना हो सफल मुझको वरदान दे’ की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुआ। इसके पश्चात मंच पर देश के ख्यातिप्राप्त कवियों डॉ. सुनील जोगी, डॉ. सुरेश अवस्थी, सरदार मनजीत सिंह, आजात शत्रु, योगिता चौहान एवं अशरफ मेवाती ने अपनी हास्य और व्यंग्य रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन सरदार मनजीत सिंह ने प्रभावी शैली में किया। अपने काव्य पाठ के दौरान उन्होंने ‘बनारस की सुबह अनुपम, वो मुस्कुराई तो मेरा दिल झनझनाया था, नेता जी के पाँव से लिपट गया कुम्भकर्ण तथा न समझो मुझे इतना ख़ास जितना समझते हो जैसी रचनाओं के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को खूब गुदगुदाया। साथ ही सामाजिक विसंगतियों, ठेकेदारी व्यवस्था, भ्रष्टाचार, चुनावी प्रलोभन और लोकतंत्र की स्थिति पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष कर गंभीर संदेश भी दिया।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए लोगों से अस्पताल के नाम के बजाय योग्य चिकित्सक की जानकारी लेने की अपील की। राजस्थान, उदयपुर से आए हास्य कवि आजात शत्रु ने राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों पर तीखे व्यंग्य प्रस्तुत किए। सत्ता, नीतियों, सुरक्षा व्यवस्था, राष्ट्रवाद, सामाजिक आचरण और भ्रष्टाचार जैसे विषयों को उन्होंने हास्य के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से उठाया। हरियाणा के मेवात से आए अशरफ मेवाती ने हादसे में शहीद हुए इंस्पेक्टर जगदीश को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की। अमल इंसानियत पर करने वाली है अभी जिंदा, वो किसी के काम आए इसी फि़क्र में रहते हैं जैसी पंक्तियों से उन्होंने श्रद्धांजलि दी। इसके अतिरिक्त वतन की शान पर हम जान भी कुर्बान कर देंगे तथा मेरी खातिर तुझे फुर्सत नहीं मगर मुझे फिर भी नफऱत नहीं जैसी देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं ने वातावरण को भावुक बना दिया।

राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित कवि डॉ. सुरेश अवस्थी ने हरियाणा-यूपी में क्या फर्क है, यह बात-बात पर मुस्कुराना तथा दिवाली में बसे अली, राम बसे रमजान में जैसी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक व्यवहार, राजनीति, भ्रष्टाचार, चिकित्सा व्यवस्था और सोशल मीडिया जैसे समसामयिक विषयों पर सशक्त और मनोरंजक प्रस्तुति दी। इटावा से आई कवयित्री योगिता चौहान ने प्रेम विषयक रचनाओं से माहौल को भावनात्मक एवं आनंदमय बना दिया। कॉलेज जीवन की स्मृतियों, सर्द मौसम, साथ और अकेलेपन पर आधारित उनकी रचनाओं को युवाओं ने विशेष उत्साह के साथ सराहा।कार्यक्रम के अंतिम चरण में पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी ने समाज में व्याप्त विरोधाभासों, 100 नंबर डायल व्यवस्था, बढ़ती महंगाई और बदलते सामाजिक मूल्यों पर व्यंग्य प्रस्तुत किया। बनारस यात्रा के दौरान दो ‘पंडितों’ के विवाद का प्रसंग सुनाकर उन्होंने नाम और पहचान के बदलते मायनों पर कटाक्ष किया। समसामयिक राजनीतिक संदर्भों पर उनकी व्यंग्यात्मक टिप्पणियों ने श्रोताओं को खूब हंसाया। उन्होंने कहा कि जब कम संख्या में भी श्रोता मुस्कुराते हुए तालियां बजाते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो कविताएं पांडवों के समक्ष पढ़ी जा रही हों। मुख्य चौपाल पर आयोजित हास्य कवि सम्मेलन श्रोताओं के लिए यादगार रहा और देर रात तक ठहाकों और तालियों की गूंज से वातावरण सराबोर रहा।

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