फरीदाबाद में मारपीट केस के 3 आरोपी बरी:झूठी गवाही देने देने पर कोर्ट ने दिया नोटिस
फरीदाबाद में सात साल पुराने जानलेवा हमला और मारपीट के मामले में एडिशनल सेशन जज केपी सिंह की कोर्ट ने तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता और घायल अपने पुलिस बयान से पलट गए और कोर्ट में आरोपियों को पहचानने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने दोनों गवाहों के बयान को गंभीरता से लिया। पुलिस को दिए बयान में आरोपियों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, लेकिन कोर्ट में दोनों ने आरोपियों को पहचानने से इनकार कर दिया। इसके बाद अभियोजन ने दोनों गवाहों को पक्षद्रोही घोषित कर उनसे जिरह की।
मामला बल्लभगढ़ सिटी थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने 24 जुलाई 2019 को आशीष, आकाश उर्फ भूरी और मोनू कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप था कि 23 जुलाई की रात तिगांव रोड पर तीन-चार युवकों ने उदय सिंह के साथ डंडों और लात-घूंसों से मारपीट की थी।
मारपीट में उदय सिंह घायल हो गया था और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मामले में गंभीर चोट और हत्या के प्रयास जैसी धाराएं भी जोड़ी गई थीं।
अभियोजन के अनुसार, उदय सिंह के भाई सुरेंद्र सिंह ने पुलिस को शिकायत दी थी। उसने आरोप लगाया था कि उसने मौके पर पहुंचकर कुछ युवकों को अपने भाई की पिटाई करते देखा था। शिकायत में आशीष का नाम भी बताया गया था।
लेकिन, कोर्ट में सुरेंद्र सिंह ने आरोपियों को पहचानने से इनकार कर दिया। उसने पुलिस शिकायत में आशीष का नाम लिखने और जान से मारने की धमकी देने की बात से भी इनकार किया। हालांकि, उसने शिकायत पर अपने हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की।
मामले के मुख्य गवाह घायल उदय सिंह ने भी कोर्ट में आरोपियों की पहचान करने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि घटना के समय तीन लड़के नशे की हालत में उसके साथ मारपीट कर रहे थे, लेकिन कोर्ट में मौजूद आरोपियों को हमलावर मानने से इनकार कर दिया। उदय ने पुलिस को दिए बयान से भी इनकार करते हुए कहा कि पुलिस ने उससे खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवाए थे।
कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित करना जरूरी है। इस मामले में मुख्य गवाहों ने आरोपियों के खिलाफ कोई विश्वसनीय बयान नहीं दिया। अन्य गवाह भी मुख्य रूप से औपचारिक थे। ऐसे में अभियोजन आरोप साबित करने में विफल रहा।
कोर्ट ने आशीष, आकाश उर्फ भूरी और मोनू कुमार को सभी आरोपों से बरी कर दिया। तीनों पहले से जमानत पर थे। अदालत ने उनके जमानत बांड रद्द कर दिए और जमानतदारों को उनके दायित्व से मुक्त कर दिया।