ईश्वर का आनंद पाने के लिए मन का नियंत्रण जरूरी: आचार्य ओमप्रकाश

आर्य समाज मंदिर, सेक्टर-7ए के तत्वावधान में सात दिवसीय वेद प्रचार कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के प्रथम दिन प्रातः कालीन सत्र की शुरुआत वैदिक रीति-रिवाज से यज्ञ के साथ हुई। यज्ञ में ब्रह्मा की भूमिका आचार्य सतीश सत्यम ने निभाई और देव यज्ञ संपन्न कराया।
सायंकालीन सत्र में भजनोपदेशक आचार्य सतीश सत्यम ने अपने मधुर भजनों और वचनों के माध्यम से महर्षि दयानन्द सरस्वती के जीवन और उनके सामाजिक सुधारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता आचार्य ओमप्रकाश आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि ईश्वर का असीम आनंद पाने के लिए शुद्ध और नियंत्रित मन का होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “जो हमारे चित में है, वही वाणी में होना चाहिए और जो वाणी में है, वही हमारे कर्म में दिखना चाहिए। कथनी और करनी की एकता ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाती है।”

आचार्य ने आगे कहा कि ईश्वर सर्वव्यापक है, वह हमारे अंदर भी है और बाहर भी, लेकिन हम उसे पहचान नहीं पाते क्योंकि हम अज्ञानता के अंधकार से ढके हुए हैं। मन की चंचलता को वश में करके ही ईश्वर का ध्यान लगाया जा सकता है। एकाग्रता से इंद्रियों को वश में करके ही हम ईश्वर के अलौकिक आनंद की अनुभूति कर सकते हैं। आत्मा और मन के संयोग से ही यह एकाग्रता संभव है। शुद्ध मन और श्रेष्ठ कर्मों के मार्ग पर चलकर ही मोक्ष की प्राप्ति की जा सकती है।

कार्यक्रम के मंच का कुशल संचालन आर्य समाज के महामंत्री सतीश कौशिक ने किया। उन्होंने कार्यक्रम के अंत में सभी आगंतुकों और श्रद्धालुओं का आभार व धन्यवाद व्यक्त किया। इस गरिमामयी अवसर पर निष्ठाकर आर्य, वसु मित्र सत्यार्थी, देशबन्धु आर्य, रमबीर नाहर, जिले सिंह आर्य, नंदकिशोर मेहता, विनोद मोदी, दिनेश जिंदल, सतीश आर्य, मदनलाल अहूजा, अर्जुन देव शास्त्री, सुनीता अग्रवाल, माता प्रकाश, संघमित्रा कौशिक, सुमन बत्रा, सविता सचदेवा, रजनी भाटिया सहित विभिन्न आर्य समाजों के अनेक प्रतिनिधि और प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।

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