बदलते मौसम में बढ़ी गले की परेशानी, जानिए आयुर्वेदिक उपाय
फरीदाबाद। मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-जुकाम, गले में खराश, दर्द और संक्रमण की शिकायतें बढ़ने लगती हैं। गले में चुभन, कुछ अटका हुआ महसूस होना, निगलने में परेशानी, आवाज का बैठना, सूखापन, खांसी या बुखार जैसे लक्षण गले के संक्रमण की ओर संकेत कर सकते हैं। कई लोगों में नाक से जुड़ी समस्या के कारण भी गले में म्यूकस जमा होने और जलन की शिकायत रहती है।
आयुर्वेद में गले की तकलीफ के लिए कई औषधीय जड़ी-बूटियों का उल्लेख मिलता है। चरक संहिता में सारिवा, मुलेठी, द्राक्षा, विदारीकंद, तुलसी और गोक्षुर सहित दस औषधियों को कंठ के लिए उपयोगी बताया गया है। गले में खराश या जलन होने पर मुलेठी और तुलसी जैसे पारंपरिक उपायों का उपयोग किया जाता है।
आयुर्वेदिक पद्धति में गर्म पानी से गरारे करने को भी गले की सफाई और आराम के लिए उपयोगी माना गया है। घर पर गुनगुने पानी में थोड़ी हल्दी और नमक डालकर गरारे किए जा सकते हैं। तुलसी, अदरक और काली मिर्च से तैयार हल्का गर्म काढ़ा भी गले को आराम पहुंचा सकता है।
आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, गले में लगातार दर्द, तेज बुखार, निगलने में अधिक परेशानी, सांस लेने में दिक्कत या लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का नियमित सेवन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना बेहतर है।