स्ट्रोक के बाद न रुकें, समय पर फिजियोथेरेपी से फिर संभलेंगे कदम
फरीदाबाद। स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाने के साथ-साथ गंभीर विकलांगता के खतरे को भी कम किया जा सकता है। चेहरे का अचानक एक तरफ झुकना, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में लड़खड़ाहट, अचानक चलने में परेशानी, संतुलन बिगड़ना या दिखाई देने में दिक्कत इसके प्रमुख संकेत हैं। ऐसे लक्षणों को पहचानने के लिए ‘फास्ट’ यानी फेस, आर्म, स्पीच और टाइम को याद रखना जरूरी है।
फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ डॉ. भावना मंगला ने बताया कि स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को इंतजार कराने या पहले पारंपरिक उपचार कराने के बजाय तुरंत ऐसे अस्पताल ले जाना चाहिए, जहां स्ट्रोक का उचित उपचार उपलब्ध हो। कई परिवार अस्पताल में ग्लूकोज या ड्रिप लगने के डर से भी देरी करते हैं, जबकि ऐसी आशंकाओं के कारण उपचार में देरी खतरनाक हो सकती है। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के शुरुआती घंटों में तत्काल विशेषज्ञ जांच जरूरी है।
डॉ. भावना ने कहा कि चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित होने पर फिजियोथेरेपी और पुनर्वास जल्द शुरू करना चाहिए। इससे कमजोरी, संतुलन, चलने-फिरने, समन्वय और रोजमर्रा के कार्यों में सुधार में मदद मिलती है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और ब्लड प्रेशर, शुगर व वजन पर नियंत्रण रखकर भविष्य में स्ट्रोक के जोखिम को कम किया जा सकता है। लक्षण पहचानें, तुरंत प्रतिक्रिया दें, समय पर इलाज और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर बचाव करें।