शिवा (सीतापुर)
3 बार एबॉर्शन होने के बाद, जब बच्चा होने की सारी उम्मीदें टूट चुकी थी,
सीतापुर की शिवा को 2.5 साल बाद नैचुरली कन्सीव किया।
उन्होंने भी आपकी तरह बहुत जगह दिखाया, शहर के हर डॉक्टर के पास गई इन ढाई सालों में उन्होंने हर वो मुमकिन कोशिश की जिससे उन्हें एक बच्चे की ख़ुशी मिल सके।
फिर आया वो दिन जब रिपोर्ट्स ने बताया की उनका AMH 0.58 जितना कम है, ऐसे में उन्होंने भी वही किया जो शायद उनकी जगह कोई भी करता, बच्चा होने की उम्मीद ही छोड़ दी और एडॉप्शन का मन बना लिया।
उन्होंने हमें बताया कि जिस दिन उनकी मीटिंग थी, उसी दिन उन्हें इंटरनेट पर आशा आयुर्वेदा का एक विज्ञापन दिखा। आज वो उस विज्ञापन को किसी चमत्कार जैसा मानती है, उस वीडियो में उन्हें वो सुनने को मिला जो आज तक किसी डॉक्टर ने उनसे कभी न कहा था।
वो जहाँ भी जाती उन्हें बस यही सुनने मिलता कि सिर्फ IVF ही आखरी ऑप्शन है। अब वो खुद से माँ नहीं बन सकती, लेकिन आशा आयुर्वेदा ने कहा कि अभी भी उम्मीद है। यह बात सुनकर उनकी आँखों में आँसू आ गए जैसे किसी ने उनके मन की बात कह दी हो। शिवा को यह विश्वास दिलाया आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा ने, जो 15+ सालों से उनकी जैसी कई महिलाओं को गुड न्यूज़ देने में सफल रही हैं। शिवा ने आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन के साथ साइड-इफेक्ट्स-फ्री आयुर्वेदिक इलाज और सही दिनचर्या को भी अपनाया। अब उन्हें खुद पर भरोसा बढ़ गया था जिससे उनका मानसिक तनाव भी कम हुआ। उनका शरीर फिर से स्वस्थ हुआ और नेचुरल प्रेगनेंसी के लिए तैयार किया गया। और आज उनका घर फिर से खुशियों से भर गया है, क्योंकि आज उनके पास उनकी छोटी सी खुशी है–शिवा की बेटी हुई है!
अगर आपको भी लगता है कि अब नेचुरल प्रेगनेंसी मुमकिन नहीं है, और IVF ही आखरी रास्ता है, तो पेनफुल सर्जरी को अपनाने से पहले सुरक्षित और पेन-फ्री आयुर्वेद को अपनाएं
शायद अगली गुड न्यूज़ आपकी हो!