कविता- वर्दी का धर्म

रचयिता- डॉ. अशोक कुमार वर्मा
9053115315

पुलिस का नारा—प्रथम सेवा धर्म हमारा,
जन-जन की सेवा, खाकी का संकल्प न्यारा।

विधि है मर्यादा, सत्य है आधार,
वर्दी में बसता है, राष्ट्र का संस्कार।

सुरक्षा चाक-चौबंद, दिन हो या रात,
नित्य करे प्रबंध, सच्चा यह अनुबंध।

हर गली, हर चौक पर, प्रहरी सजग खड़ा,
निश्चिंत सोए समाज, जब वर्दी वाला जगा।

सहयोग हमारा कर्म, जन जन से वर्दी का नाता,
विश्वास की डोर न टूटे, खाकी वचन निभाता।

हृदय से खाकी है नर्म, पर संकल्प है अडिग,
अपराध के आगे वर्दी कभी न हो विगलित।

जहाँ अन्याय का अन्धकार हो,
वहाँ उपजता है न्याय प्रकाश,
कठोर हाथ अपराध पर,
करता दानव का विनाश।

यही पुलिस का पथ है, यही जीवन ध्येय,
सेवा, सुरक्षा, सहयोग—वर्दी का सत्य नेय।

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