20 वर्षीय युवक को आया हार्ट अटैक, एसएसबी अस्पताल ने इलाज कर बचाई जान

फरीदाबाद। ‘हार्ट अटैक’ का नाम सुनते ही हम पहले सोचते थे कि यह बड़ी उम्र के लोगों को ही होता है, लेकिन मौजूदा समय में किसी भी उम्र का व्यक्ति इसकी चपेट में आ सकता है। इसका ताजा उदाहरण फरीदाबाद के एसएसबी हार्ट एंड मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सामने आया, जब 20 वर्षीय युवक को गंभीर हार्ट अटैक आने पर उसे एसएसबी अस्पताल लाया गया, जहां डाक्टरों ने समय पर इलाज करके उक्त युवक को नया जीवन दिया गया।  युवक को रात लगभग डेढ़ बजे सीने में तेज दर्द, दिल की धडकऩ तेज होने और अत्यधिक पसीना आने की शिकायत के साथ अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में लाया गया। जांच के दौरान उसे एक्यूट एंटीरियर वॉल मायोकार्डियल इंफाक्र्शन (हार्ट अटैक का गंभीर प्रकार) पाया गया। आपातकालीन कोरोनरी एंजियोग्राफी में पता चला कि हृदय की मुख्य धमनियों में से एक लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग आर्टरी, जिसे आमतौर पर ‘विडो मेकर’ कहा जाता है, पूरी तरह से ब्लॉक हो चुकी थी।

यह धमनी हृदय के बड़े हिस्से में रक्त पहुंचाने का कार्य करती है। इसके कारण मरीज की हृदय पंप करने की क्षमता घटकर लगभग 40 प्रतिशत रह गई थी, जो हृदय की मांसपेशियों को हुए गंभीर नुकसान का संकेत था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसएसबी अस्पताल की कार्डियक टीम ने मरीज के अस्पताल पहुंचने के एक घंटे के भीतर प्राथमिक एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। विशेष कैथेटर तकनीक की सहायता से डॉक्टरों ने एक अत्याधुनिक दवा-युक्त स्टेंट लगाया, जिससे हृदय में रक्त प्रवाह पुन: सामान्य हो गया और ब्लॉकेज वाली धमनी खुल गई। जटिल प्रक्रिया होने के बावजूद उपचार में किसी प्रकार की देरी नहीं की गई, जिसके परिणामस्वरूप मरीज तेजी से स्वस्थ हुआ और उसे स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। एसएसबी हेल्थकेयर के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. एस. एस. बंसल ने कहा कि 20 वर्ष के युवक में हार्ट अटैक होना पूरे समाज के लिए चेतावनी है। युवा अक्सर यह मानते हैं कि हृदय रोग केवल बुजुर्गों को होता है और वे सीने में दर्द, सांस फूलना या अत्यधिक पसीना आने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं।

जबकि हार्ट अटैक में हर मिनट की देरी हृदय की मांसपेशियों को और अधिक नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने बताया कि युवाओं में बढ़ते हृदय रोग के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें धूम्रपान, वेपिंग, तंबाकू सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी, अधिक वसा एवं प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, लगातार तनाव, पर्याप्त नींद की कमी तथा आनुवंशिक या पारिवारिक कारण शामिल हैं। डॉ. बंसल ने लिपोप्रोटीन (ए) [एलपी(ए)] नामक रक्त जांच के महत्व पर भी जोर दिया। यह जांच अभी भारत में सामान्य रूप से नहीं कराई जाती, लेकिन युवाओं में हृदय रोग के छिपे हुए जोखिमों का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास रहा है या जिन्हें समय से पहले हृदय संबंधी समस्याएं हुई हैं, उन्हें अपने कार्डियोलॉजिस्ट से एलपी (ए) जांच के बारे में अवश्य चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सामान्य कोलेस्ट्रॉल के विपरीत, एलपी (ए) का स्तर मुख्य रूप से आनुवंशिक कारणों से निर्धारित होता है। इसलिए नियमित व्यायाम करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के बावजूद कुछ लोगों में हृदय रोग का खतरा बना रह सकता है।

व्यक्ति के जोखिम स्तर को देखते हुए चिकित्सक सिटी कोरोनरी एंजियोग्राफी की सलाह भी दे सकते हैं। यह एक विशेष प्रकार का हृदय का सिटी स्कैन है, जो मात्र 15 मिनट में हृदय की धमनियों की विस्तृत तस्वीर प्रदान करता है और किसी भी प्रकार की संकीर्णता या ब्लॉकेज का पता लगाने में मदद करता है। डॉ. बंसल ने कहा, हार्ट अटैक के दौरान हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। इलाज में देरी से हृदय को स्थायी नुकसान, हृदय की कार्यक्षमता में कमी, हार्ट फेल्योर और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है। इस मामले में मरीज के अस्पताल पहुंचने के एक घंटे के भीतर एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली गई, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी। उन्होंने बताया कि एसएसबी अस्पताल में 24 घंटे कार्डियक इमरजेंसी, कैथ लैब, एंजियोप्लास्टी एवं स्टेंटिंग सेवाएं उपलब्ध हैं, जिससे हार्ट अटैक के मरीजों को रात या छुट्टियों के दौरान भी तत्काल उपचार मिल सके। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि केवल कम उम्र होना हृदय रोग से सुरक्षा की गारंटी नहीं है। समय रहते लक्षणों को पहचानना और अनुभवी कार्डियक इमरजेंसी टीम एवं 24 घंटे कार्यरत कैथ लैब वाले अस्पताल तक शीघ्र पहुंचना ही जीवन बचाने और स्थायी नुकसान से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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