67 हजार बच्चों को मिड-डे मील परोसने वाली संस्था के 3 करोड़ अटके
फरीदाबाद। सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए मिड-डे मील सिर्फ दोपहर का भोजन नहीं, बल्कि उनकी पढ़ाई के साथ पोषण की जरूरत पूरी करने का भी एक अहम सहारा है। लेकिन, इन बच्चों की थाली तक पोषण युक्त भोजन पहुंचाने वाली संस्था पिछले छह महीने से भुगतान का इंतजार कर रही है। शिक्षा विभाग की ओर से अप्रैल से सितंबर की राशि जमा नहीं की गई है। विभाग को अनामृता फाउंडेशन को करीब 3.70 करोड़ रुपये जमा करने हैं। जिले के 378 सरकारी स्कूलों में बाल वाटिका से आठवीं कक्षा तक पढऩे वाले करीब 67 हजार है। इन विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत मिड-डे मील उपलब्ध कराया जाता है।
विद्यार्थियों के लिए स्कूल में मिलने वाला भोजन दिन की एक महत्वपूर्ण जरूरत है। खासकर उन परिवारों के बच्चों के लिए जिनके लिए पौष्टिक भोजन की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में भोजन तैयार करने वाली संस्था पर बढ़ता आर्थिक दबाव केवल भुगतान का मामला नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों तक भोजन पहुंचाने वाली व्यवस्था की निरंतरता से भी जुड़ा है। अनामृता फाउंडेशन की ओर से बकाया राशि के भुगतान के लिए जिला उपायुक्त आयुष सिन्हा और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी पत्र लिखा गया है।
मिडे डे मील का पैसा नहीं मिलने की वजह से फाउंडेशन के लिए भी विद्यार्थियों के लिए मेन्यू के अनुसार भोजन परोसना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। भोजन तैयार करने के लिए कच्चा माल, रसोई का संचालन और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं लगातार चलानी पड़ती हैं। इसके लिए नियमित रूप से धन की जरूरत होती है। भुगतान में लंबे समय तक देरी होने से इन खर्चों को पूरा करना संस्था के लिए मुश्किल होता जा रहा है। हालांकि, भुगतान में देरी का असर भोजन की गुणवत्ता पर नहीं हुआ है। स्कूलों में नियमित रूप से मिड डे मील का भोजन पहुंच रहा है। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी बसंत कुमार ढिल्लो का कहना है कि शिक्षा विभाग की ओर से बजट उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। जल्द राशि जारी होने की उम्मीद है। निदेशालय की ओर से इस संबंध में बजट सहित अन्य जानकारी भी मांगी गई है।