जे.सी.बोस विश्वविद्यालय में गीता जयंती पर आध्यात्मिक एवं बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन

फरीदाबाद। जे.सी.बोस वाईएमसीए ने आज गीता जयंती के पावन अवसर पर एक भव्य आध्यात्मिक एवं बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भगवद्गीता के प्रख्यात व्याख्याता, पाँच दशकों से अधिक समय से गीता-दर्शन के अध्ययन, अध्यापन एवं प्रचार-प्रसार में संलग्न सुप्रसिद्ध विद्वान एवं शिक्षाविद् आचार्य राजेंद्र कुमार अनायत रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राजीव कुमार ने की।

कुलगुरु प्रो.राजीव कुमार ने भगवद्गीता को भारतीय ज्ञान-परम्परा का शाश्वत प्रकाश-पुंज बताया। उन्होंने कहा कि गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, अपितु कर्मयोग, भक्तियोग एवं ध्यान योग की जीवंत शिक्षा है जो प्रत्येक युग में मनुष्य को धर्म, कर्तव्य एवं आत्मबोध का मार्ग दिखाती है। कुलगुरु ने विश्वविद्यालय परिवार, विशेषकर विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे गीता के नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में उतारकर राष्ट्र-निर्माण में योगदान दें।

मुख्य व्याख्यान में आचार्य राजेंद्र कुमार अनायत ने गीता के तत्त्वज्ञान, उसके वैश्विक महत्व तथा आधुनिक युग में इसकी प्रासंगिकता पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने गीता को ‘आध्यात्मिक विज्ञान’ की संज्ञा देते हुए कहा कि यह मन, बुद्धि एवं आत्मा के शुद्धिकरण का शाश्वत माध्यम है तथा जीवन के हर पड़ाव पर संतुलन, समर्पण और साधना का मार्ग दिखाती है।
हरियाणा के गीता से गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए आचार्य अनायत ने कहा कि कुरुक्षेत्र अर्थात् हरियाणा भूमि भगवान श्रीकृष्ण के अमर उपदेश की जन्मस्थली है। हरियाणा के अस्तित्व को केवल सन् 1966 तक सीमित करना उसके प्राचीन धार्मिक, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक गौरव को नकारना है।

कार्यक्रम में गीता-महात्म्य, गीता जयंती का इतिहास तथा गीता में वर्णित विभिन्न योग-दर्शन पर भी सार्थक चर्चा हुई। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, शिक्षक तथा कर्मचारी श्रद्धा और उत्साह के साथ उपस्थित रहे। सम्पूर्ण कार्यक्रम अत्यंत पवित्र, शांत एवं प्रेरणादायी वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रो. अतुल मिश्रा की देखरेख में डॉ. पारुल तोमर तथा डॉ.सोनाली द्वारा और मंच संचालन डॉ.अखिलेश त्रिपाठी ने किया।

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