श्रीकृष्ण ने वेदों के अनुकूल जिया जीवन, देश को एक सूत्र में पिरोया – आचार्य डॉ. पुनीत शास्त्री
आर्य केन्द्रीय सभा (नगर निगम क्षेत्र) फरीदाबाद के तत्वावधान में श्रावणी पर्व के पावन उपलक्ष्य में आयोजित आठ दिवसीय वेद प्रचार कार्यक्रम के अंतर्गत आर्य समाज, सेक्टर-7ए के प्रांगण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुविख्यात वैदिक विद्वान आचार्य डॉ. पुनीत शास्त्री (मेरठ) ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में भगवान श्रीकृष्ण के वास्तविक जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योगिराज भगवान श्रीकृष्ण ने वेदों के अनुसार अपने पूरे जीवन को जिया। वे प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर संध्या वंदन करते थे, गौशाला में गौमाता की सेवा करते थे और दैनिक यज्ञ करने के बाद ही राजसभा में जाते थे।
आचार्य जी ने महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती जी द्वारा रचित ‘सत्यार्थ प्रकाश’ का संदर्भ देते हुए कहा कि महाभारत में श्रीकृष्ण का इतिहास अत्यंत उत्तम है। उनका गुण, कर्म, स्वभाव और चरित्र आप्त पुरुषों के सदृश है। उन्होंने जन्म से मरण पर्यन्त कोई अधर्म या बुरा कार्य नहीं किया। भागवत पुराणकारों ने उन पर अनुचित और मनमाने दोष लगाए हैं, जो पूरी तरह निराधार हैं। श्रीकृष्ण ने जीवन में केवल एक पत्नी रुक्मिणी से विवाह किया और 12 वर्षों तक कठोर ब्रह्मचर्य का पालन करके प्रद्युम्न नामक पुत्र को जन्म दिया, जो आचार, विचार और रूप में बिल्कुल उन्हीं के समान था।
डॉ. शास्त्री ने आगे कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने उस समय खंड-खंड में बंटे हुए भारत को एक सूत्र में पिरोकर ‘महाभारत’ (विशाल भारत) बनाने का महान कार्य किया। आज यदि हमें देश को उन्नति के शिखर पर ले जाना है, तो हमें श्रीकृष्ण की उन्हीं नीतियों और आदर्शों पर चलना होगा।
कार्यक्रम में भजन उपदेशक जितेन्द्र सरल ने अपनी मधुर वाणी में प्रेरणादायक भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने मंच का कुशल संचालन भी किया
आर्य समाज के महामंत्री सतीश कौशिक ने कार्यक्रम में पधारे सभी आमंत्रित विद्वानों, अतिथियों और श्रद्धालु जनों का वैदिक रीति से स्वागत किया तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए अंत में सभी का धन्यवाद व आभार ज्ञापित किया।
इस अवसर पर देशबन्धु आर्य, निष्ठाकर आर्य, कचंदर्म शास्त्री, वसु मित्र सत्यार्थी, शिव कुमार टुटेजा, दयानन्द आर्य, संजय खट्टर आर्य, दयानंद विरमानी, होतीलाल आर्य, जगदीश विरमानी, संघमित्रा कौशिक, रुक्मणी टुटेजा, नर्वदा शर्मा, सहित फरीदाबाद की विभिन्न आर्य समाजों के पदाधिकारी एवं अनेक गणमान्य प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।