सब मिलकर रोकते थे अब राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से रोक नहीं पाए हैं
चंद्र मोहन भगत
कभी बंशीलाल गुर्जर को फ्रंट लाइन में आने के लिए विधायक सांसद का प्रत्याशी बनने से संसदीय क्षेत्र के सारे प्रतिस्पर्धी मिलकर रोकने में सफल हो जाते थे। इस सिलसिले की उम्र दो दशक से अधिक है। इस बीच बंसी गुर्जर ने जिस आलोचना उलाहना तिरस्कार को अंगीकार किया वहीं उनकी संगठन के प्रति समर्पण के नंबर को बडाते गए। इस दायित्व बोध की गहराई को आम कार्यकर्ता से लेकर प्रतिस्पप्रधी भी पैमाणित नहीं कर पा रहे थे ना ही समझ पा रहे थे। बीजेपी संगठन की इस कार्य प्रणाली को गहराई से समझने वाले वरिष्ठ अनुभवी पदाधिकारी जरूर अपने विचारों में यह जाहिर करते रहे थे की बंसी गुर्जर का राजनीतिक भविष्य सामान्य से अधिक उज्जवल है।
समय ऐसा भी आएगा की प्रतिस्पर्धी उनके सामने स्वतः बोने साबित होंगे। हाल ही की भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम की घोषणा में राष्ट्रीय किसान मोर्चा अध्यक्ष पद का दायित्व देकर गुर्जर की काबिलियत और सांगठनिक दक्षता पर मेरिट की मोहर लगा दी है।बंसी गुर्जर संगठन की पसंद पहले भी रहे हैं। प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक। इसलिए उनकी राजनीतिक यात्रा प्रगति दर प्रगति की ओर अग्रसर रही है। अंतर सिर्फ उन लोगों पर गहरा होगा जिन प्रतिस्पर्धियों ने उन्हें रोकने के प्रयासों में कभी कंजूसी नहीं की थी।
वर्तमान में जो राजनीतिक दृश्य आकार ले रहे रहा है उसमें भी गुर्जर की स्थिति मजबूत होती ही नजर आ रही है। लगातार अगर इसी गति और घनत्व से संगठन में दायित्व मिलता रहा तो जो स्पर्धा उनके रास्ते में बाधाए खड़ी करते रहे थे वह भविष्य में इनसे सहारा मांगते नजर आएंगे।
खैर बीते दौर में मंच से इनका नाम लेने से जीन के चेहरे पर कड़वाहट नजर आती थी, अब अभिवादन की मिठास बिखेरते नजर आएंगे।
बंसी गुर्जर की भाजपा संगठन में विभिन्न पदों की यात्रा कुछ इस तरह की रही की राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों में सरपंच से लेकर विभिन्न संस्थाओं के अध्यक्ष निर्देशक से बढ़ते हुए राष्ट्रीय किसान मोर्चा अध्यक्ष तक पहुंच चुके हैं। चुंकि कृषक जगत के नेता हैं इसलिए चिन्हित किए जाने वाला कार्यकाल 1996 में मंदसौर नीमच संयुक्त जिले के किसान मोर्चा अध्यक्ष बनाए गए थे। बाद में 2009 से 16 तक प्रदेश किसान मोर्चा अध्यक्ष रहे थे। इसी कार्यकाल में गुर्जर को कृषि जगत में केंद्रीय कृषि मंत्रालय तक जब कृषि मंत्री शरद पवार हुआ करते थे राष्ट्रीय दर्जे की हैसियत वाला नेता माना जाने लगा था। 2014 से 2020 तक प्रदेश महामंत्री का दायित्व भी निभाया है। इन्हीं राजनीतिक गतिविधियों के सफल नतीजो के कारण विभिन्न विधानसभा चुनाव में गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, असम, महाराष्ट्र,उड़ीसा और बिहार राज्यों में भी संगठन के लिए जिम्मेदारियां निभाते आए हैं। इन जिम्मेदारी भरे दायित्व के बीच यह उल्लेख आवश्यक है कि जब भी बंसी गुर्जर को विधानसभा लोकसभा में प्रत्याशी न बनाकर संगठन ने दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी देकर जिस राज्य में भी भेजा संगठन आदेश को शिरोधार्य कर बखूबी समर्पण से दायित्व को निभाते रहे हैं। युवावस्था से लगातार इतने छोटे बड़े दायित्व को निभाते हुए प्रत्याशी ना बनाए जाने पर शिकवा शिकायत से हमेशा दूर रहे। समर्पित कार्यकर्ता की तरह 2023 चुनाव के ठीक पहले की जन आशीर्वाद यात्रा को भी इतनी सफलता से अंजाम दिया कि इस बीच यात्रा में आए राष्ट्रीय नेताओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, अमित शाह, राजनाथ सिंह, रेल मंत्री अश्विन जैसे बड़े नेताओं ने भी गुर्जर की राजनीतिक क्षमता को पहचाना और प्रशंसा की थी। किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पाने के बाद क्षेत्रीय भाजपाईयों को राष्ट्रीय हैसियत पाने वाला नेता अपने बीच नजर आएगा। स्थानीय भाजपाइयों को स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा के बाद भाजपा की केंद्रीय राजनीति में प्रतिनिधित्व करने वाला कार्यकर्ता नेता मिल चुका है।