उत्तर भारत में गणेश विसर्जन की प्रथा बिल्कुल गलत है : हरीश आजाद
फरीदाबाद। समाजसेवी हरीश चन्द्र आजाद ने कहा कि आजकल महाराष्ट्र में गणपति महोत्सव धूमधाम से चल रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से गणपति महोत्सव उत्तर भारत में भी धूमधाम से मनाया जा रहा है। लेकिन यह बिल्कुल गलत है। बिना सोचे-समझे हम लोग उत्तर भारत में भी गणेश जी को विराजमान करते हैं, फिर विसर्जन कर देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत है।
हरीश आजाद ने कहा कि मैं अभी पुणे में भारत के दूसरे सबसे बड़े गणपति जी के मंदिर दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर में दर्शन करने गया था। वहां पूजा करते हुए मैंने पंडित जी को बताया कि पिछले कुछ वर्षों से उत्तर भारत में भी गणपति विसर्जन धूमधाम से मनाया जाता है। तब पंडित जी ने बताया कि यह बिल्कुल गलत प्रथा उत्तर भारत के लोगों ने आरंभ कर दी है। उन्होंने कहा कि मैं आपको गणपति चतुर्थी का मतलब बताता हूं। गणपति जी का घर उत्तर भारत है और उनके बड़े भाई कार्तिकेय जी का पश्चिम भारत में।
गणेश चतुर्थी को गणेश जी अपने भाई कार्तिकेय जी से मिलने पश्चिम भारत आते हैं, जहां उनका धूमधाम से घरों को, बाजारों को सजाकर स्वागत किया जाता है और उनको अपने घर पर, मोहल्ले में स्थापित किया जाता है। फिर 10 से 12 दिन (शास्त्रों के मुहूर्त के हिसाब से) भाई के यहां पश्चिम भारत में गणेश जी रहते हैं। फिर पश्चिम भारत के लोग उनको धूमधाम से विसर्जन करते हैं और फिर गणेश जी वापस अपने घर उत्तर भारत में आ जाते हैं। लेकिन हम उत्तर भारत के लोग बिना सोचे-समझे, बिना ज्ञान के गणेश जी को उनके घर उत्तर भारत से भी विसर्जन करके भेज देते हैं। जरा सोचें, हम पाप कर रहे हैं। इसलिए मैं प्रार्थना करूंगा सभी उत्तर भारत के लोगों से कि अगर गणेश महोत्सव मनाना भी है तो जब उनको पश्चिम भारत से विसर्जन किया जाता है तो उत्तर भारत में उनका घर वापसी का धूमधाम से स्वागत करें, लेकिन विसर्जन की प्रथा को उत्तर भारत में बंद कर दें।