भूलने को उम्र का असर न समझें, धीरे-धीरे याददाश्त छीनता है अल्जाइमर : डॉ. रोहित गुप्ता
फरीदाबाद। किसी बात को बार-बार भूलना, परिचित लोगों के नाम याद न रहना, सामान रखकर उसकी जगह भूल जाना या रोजमर्रा के कामों में परेशानी होना केवल बढ़ती उम्र का सामान्य असर नहीं हो सकता। ये अल्जाइमर बीमारी के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं। बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और समय के साथ व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। ग्रेटर फरीदाबाद स्थित एकॉर्ड अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. रोहित गुप्ता के अनुसार अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे आम कारण है। इसका खतरा उम्र बढऩे के साथ बढ़ता है हालांकि 65 वर्ष से कम उम्र में भी बीमारी की शुरुआत हो सकती है। ऐसे मामलों को यंगर-ऑनसेट अल्जाइमर या डिमेंशिया की श्रेणी में रखा जाता है। लगातार स्क्रीन टाइम, शारीरिक गतिविधि की कमी, खराब नींद और अस्वस्थ जीवनशैली मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।
धीरे-धीरे बढ़ती है अल्जाइमर की शुरुआत अक्सर हल्की भूलने की समस्या से होती है। बाद में व्यक्ति बातचीत, पैसे के लेन-देन, रास्ता पहचानने और रोजमर्रा के कामों में परेशानी महसूस कर सकता है। बीमारी बढऩे पर परिवार के सदस्यों को पहचानने में भी दिक्कत हो सकती है। इसी कारण शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर न्यूरोलॉजिकल जांच कराना जरूरी है।अल्जाइमर में उम्र के साथ आनुवंशिकता भी भूमिका निभा सकती है। परिवार में किसी सदस्य को बीमारी होने से जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अगली पीढ़ी में बीमारी होना निश्चित है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता और अन्य हृदय संबंधी जोखिम भी डिमेंशिया के खतरे से जुड़े हैं। बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली जरूरी,नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, मानसिक और सामाजिक रूप से सक्रिय रहना तथा ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है। धूम्रपान से बचना और उम्र बढऩे के साथ याददाश्त में लगातार बदलाव होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना भी जरूरी है।