सतयुग दर्शन विद्यालय का 26वां स्थापना दिवस एवं वार्षिकोत्सव करुणा और समभाव के साथ हुआ सम्पन्न

फरीदाबाद। सतयुग दर्शन विद्यालय ने अपने गौरवशाली 26वें स्थापना दिवस एवं वार्षिकोत्सव का आयोजन मानवता, करुणा, एकत्व और समभाव जैसे शाश्वत जीवन-मूल्यों को समर्पित एक भव्य, भावपूर्ण एवं अविस्मरणीय समारोह के रूप में किया। सांस्कृतिक वैभव, सृजनात्मक अभिव्यक्ति और मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत इस आयोजन ने न केवल उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि प्रत्येक हृदय में प्रेम, सद्भाव और मानवता के प्रति नई चेतना का संचार भी किया। विद्यालय की 26 वर्षों की गौरवमयी यात्रा शिक्षा के साथ संस्कार, ज्ञान के साथ विवेक और उपलब्धियों के साथ मानवीय मूल्यों को प्रतिष्ठित करने की उसकी अटूट प्रतिबद्धता का परिचय देती है। विद्यालय का मूल दर्शन सदैव यही रहा है कि मानवता ही वह सशक्त आधारशिला है,

जिस पर प्रेम, शांति और समरसता से परिपूर्ण समाज का निर्माण संभव है। विद्यालय की गौरवशाली परंपरा रही है कि प्रत्येक वर्ष वार्षिकोत्सव के लिए ऐसी विषय-वस्तु का चयन किया जाता है, जो समकालीन सामाजिक परिस्थितियों एवं जीवन की चुनौतियों से गहरा सरोकार रखती हो। इस आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन अथवा सांस्कृतिक प्रदर्शन तक सीमित न होकर विद्यार्थियों एवं समाज को उन शाश्वत मूल्यों से जोडऩा है, जो भावी पीढ़ी के चरित्र निर्माण और एक आदर्श समाज की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी प्रेरणादायी दृष्टिकोण को आत्मसात करते हुए इस वर्ष भी विद्यार्थियों ने विभिन्न युगों की अवधारणाओं को अपनी सशक्त सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अत्यंत प्रभावशाली एवं कलात्मक ढंग से जीवंत किया और मानवता के महत्व को बड़े ही मार्मिक रूप में अभिव्यक्त किया। इस गरिमामय अवसर पर संस्था के मार्गदर्शक श्री सज्जन जी एवं श्रीमती रश्मा गांधी की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की भव्यता और महत्ता को और अधिक बढ़ा दिया।

विद्यालय इस दृढ़ विश्वास के साथ कार्य करता है कि प्रत्येक बालक अपने भीतर विलक्षण प्रतिभा, सृजनात्मक क्षमता और असीम संभावनाएं समेटे हुए है। इसी विचार को व्यवहार में परिणत करते हुए समारोह में शत-प्रतिशत विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई, ताकि प्रत्येक बच्चे को अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और रचनात्मक कौशल को मंच पर अभिव्यक्त करने का समान अवसर प्राप्त हो सके। यह पहल विद्यालय की समावेशी शिक्षा-दृष्टि और प्रत्येक विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण बनी। इसके पश्चात विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। अपने संबोधन में उन्होंने समारोह में पधारे संस्था के मार्गदर्शक श्री सज्जन जी, श्रीमती रश्मा गांधी, समस्त विशिष्ट अतिथियों, अभिभावकों एवं अन्य आगंतुकों का हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत किया। उन्होंने विद्यालय की 26 वर्षों की गौरवशाली शैक्षणिक यात्रा, शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक उपलब्धियों, विद्यार्थियों की उल्लेखनीय सफलताओं तथा शिक्षकों के समर्पित योगदान का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस समारोह का सर्वाधिक आकर्षक एवं हृदयस्पर्शी पक्ष रहीं। विद्यार्थियों ने अपने भावपूर्ण अभिनय, मनोहारी नृत्य, सुमधुर संगीत, अद्भुत तालमेल और प्रभावशाली मंचीय अभिव्यक्ति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विभिन्न युगों की अवधारणाओं को वर्तमान सामाजिक परिवेश और मानवीय जीवन-मूल्यों के साथ जिस कलात्मक सूझबूझ एवं संवेदनशीलता से पिरोया गया, उसने कार्यक्रम को एक विशिष्ट वैचारिक ऊंचाई प्रदान की। प्रत्येक प्रस्तुति अपने भीतर एक संदेश समेटे हुए थी, जो दर्शकों के मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ती चली गई। अपने बच्चों को मंच पर पूरे आत्मविश्वास, सहजता और दक्षता के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते देखकर अनेक अभिभावक भावविभोर हो उठे। उनकी आंखों में छलकते आनंदाश्रु बच्चों की उपलब्धियों के प्रति गर्व, वात्सल्य और अपार स्नेह की मूक किंतु अत्यंत प्रभावशाली अभिव्यक्ति बन गए। वास्तव में, वह क्षण केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति का नहीं, बल्कि अभिभावकों के सपनों, बच्चों के परिश्रम और शिक्षकों के अथक मार्गदर्शन के साकार होने का उत्सव था। कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय के कॉर्डिनेटर दीपक वशिष्ठ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए संस्था के मार्गदर्शकों, अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी के सहयोग एवं सहभागिता को समारोह की सफलता का आधार बताते हुए सभी का सादर धन्यवाद किया।

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