सोतई गांव में भारी पुलिस बल के बीच शुरू हुआ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण, मुआवजे को लेकर अड़े हैं किसान
फरीदाबाद। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर फरीदाबाद के सोतई गांव में तनाव बरकरार है। जमीन के मुआवजे व मालिकाना हक को लेकर जारी विरोध के बीच बुधवार को प्रशासन ने भारी पुलिस सुरक्षा के साथ निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया। प्रशासन ने जाट पट्टी शामलात भूमि पर अर्थमूवर मशीनों से जमीन समतल करने और सड़क निर्माण के लिए मिट्टी तथा पत्थर डालने का कार्य आरंभ किया। सुबह एक महिला द्वारा विरोध किए जाने पर पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया।
मंगलवार को हुई थी हिंसक झड़प और गिरफ्तारियां
यह कार्रवाई मंगलवार को हुए विवाद के एक दिन बाद हुई। मंगलवार दोपहर एसडीएम मयंक भारद्वाज और तहसीलदार भूमिका लांबा पुलिस बल के साथ सोतई गांव पहुंचे थे। अधिकारियों ने निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास किया तो किसानों ने मुआवजा मिलने से पहले जमीन पर कब्जा देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया और झड़प की स्थिति बन गई। ग्रामीणों ने पुलिस पर बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार वेद प्रकाश पंडित, योगेश, विशाल, कैलाश, हीरा, ब्रीजा, पूनम और विद्या समेत कई ग्रामीण घायल हुए, जिन्हें बादशाह खान अस्पताल में भर्ती कराया गया। हंगामे के बाद पुलिस ने 15 किसानों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया।
मुआवजे को लेकर आमने-सामने
सोतई में विवाद जाट पट्टी शामलात भूमि के अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर है। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। ऐसे में मुआवजा दिए बिना जमीन का कब्जा नहीं लिया जाना चाहिए। वहीं, एनएचएआई का कहना है कि मुआवजा राशि अदालत में जमा कराई जा चुकी है। इस राशि पर नगर निगम ने भी दावा किया है। अधिकारियों के अनुसार अदालत के निर्णय के आधार पर ही भुगतान किया जाएगा। हालांकि, ग्रामीण इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं।
महापंचायत में लिया था निर्णय
मुआवजे के मुद्दे को लेकर हाल ही में 12 गांवों की महापंचायत हुई थी। इसमें फैसला लिया गया था कि मुआवजा मिलने तक जमीन पर कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। विधायक रघुबीर सिंह तेवतिया ने भी इस मामले को विधानसभा के मॉनसून सत्र में उठाया था।
वहीं, एसडीएम मयंक भारद्वाज ने पुलिस बल प्रयोग के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि किसानों को पहले नोटिस दिए गए थे और वीडियोग्राफी के बीच नियमानुसार कार्रवाई की गई। 31.42 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की संशोधित लागत मार्च 2026 में 3,630.77 करोड़ रुपये मंजूर की गई थी। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच निर्माण कार्य शुरू करा दिया है, लेकिन मुआवजे को लेकर ग्रामीणों का विरोध अभी जारी है।