हड़ताल के कारण करीब 50 से ज्यादा फीडर ब्रेक डाउन होने से अधिकांश हिस्से की बिजली गुल
फरीदाबाद। गुरुग्राम व नूंह की बिजली वितरण में पैरलल लाइसेंस देने के खिलाफ बृहस्पतिवार से शुरू हुई तीन दिवसीय हड़ताल का फरीदाबाद में व्याप्त असर रहा। हड़ताल में बिजली के लगभग सभी कर्मचारी और इंजीनियर (अधिकारी) हड़ताल पर रहे। जिसके कारण सभी बिजली शिकायत केन्द्र,सब डिवीजन, सब डिवीजन व डिवीजन व सर्कल आफिस सूनसान पड़े रहे और कोई काम-काज नहीं हुआ। सभी कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने का कारण लगभग ढाई हजार बिजली शिकायतों का निवारण नहीं हुआ। हड़ताल के चलते अटाली और आईएसई 33 केवी फीडर ब्रेक डाउन होने से इन सब स्टेशन से निकलने वाले सभी 11 फीडर और अर्बन क्षेत्र के 12 फीडर, रिहायशी क्षेत्र के 14 फीडर, औद्योगिक क्षेत्र के 8 और कृषि क्षेत्र के 9 फीडर बंद रहे।
जिसके कारण फरीदाबाद क्षेत्र के बड़े हिस्से में बिजली गुल रही। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संधर्ष मोर्चा के सदस्य संदीप प्रताप भाटी, आदिनाथ शब्बीर अहमद गनी, विनोद शर्मा, सुनील चौहान, लेखराज चौधरी, कृष्ण कुमार कालीरमन, मनोज जाखड़ आदि नेताओं ने बताया कि सर्कल फरीदाबाद में 99 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारी और इंजीनियर हड़ताल पर रहे। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री,जिला प्रधान करतार सिंह जागलान व सचिव बलबीर सिंह बालगुहेर ने भी हड़ताल का पुरजोर समर्थन किया। हड़ताली कर्मचारियों ने अपने-अपने कार्यालयों के बाहर निजीकरण और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। नेताओं ने जोर देकर कहा कि बिजली कर्मचारी जानबूझकर बिजली बंद नहीं कर रहे हैं। फीडर रोजाना ब्रेक डाउन होते हैं और कर्मचारी उनको चालू करने का काम करते हैं। लेकिन आज हड़ताल के चलते ब्रेक डाउन फीडर चालू नहीं हो रहें हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यक सेवाओं स्वास्थ्य सेवाएं और पानी सप्लाई के लीडर ब्रेक डाउन हुए तो हड़ताल पर रहते हुए कर्मचारी उन्हें चालू करेंगे।
इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा व मोर्चा के सदस्य विनोद कुमार ने ब्रेक डाउन हुए फीडर चालू न होने के कारण आम नागरिकों को हो रही परेशानियों के लिए माफी मांगी और इन परेशानियों के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारी अपनी वेतन बढ़वाने के लिए हड़ताल नहीं कर रहे हैं। हम हड़ताल बिजली को निजी हाथों में सौंपने से बचाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम व नूंह के बाद फरीदाबाद और पंचकूला का निजीकरण होगा। अगर बिजली का निजीकरण होगा तो बिजली के रेट बढ़ेेंगेऔर बिजली गरीब और किसान की पहुंच से बाहर हो जाएगी। उन्होंने कहा की दोनों बिजली वितरण निगमों, बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर, संयुक्त किसान मोर्चा, मजदूर संगठनों के तीखे विरोध के बावजूद हरियाणा पावर रेगुलेटरी कमीशन ने गुरुग्राम व नूंह की बिजली वितरण में निजी कंपनी को पैरलल लाइसेंस देने के आदेश दिए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री के निजीकरण के खिलाफ और बिजली कर्मियों के साथ खड़े होने के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अगर ऐसा है तो फिर निजीकरण के पैरलल लाईसेंस क्यों दिए जा रहे हैं।