राष्ट्रीय पोषण सप्ताह : बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की नींव है संतुलित आहार : डॉ. प्रभात वाजपई
फरीदाबाद। पोषण की कमी से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ रहा है राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के अवसर पर बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और विकास के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। बचपन में मिलने वाला सही पोषण बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता, शारीरिक विकास और मानसिक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खासकर छोटे बच्चों के खानपान पर माता-पिता को विशेष ध्यान देना चाहिए। एकॉर्ड अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभात के अनुसार, बच्चों के विकास के लिए केवल पेट भरना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भोजन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, स्वस्थ वसा, विटामिन और खनिज तत्वों का उचित संतुलन होना जरूरी है।
बच्चों को उनकी उम्र और जरूरत के अनुसार पौष्टिक आहार देना चाहिए। उन्होंने बताया कि बच्चों के भोजन में दाल, दूध एवं दूध से बने पदार्थ, अंडा, हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज और सूखे मेवे जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। छोटे बच्चों के लिए भोजन की मात्रा के साथ उसकी गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है। बार-बार पैकेट वाले खाद्य पदार्थ, अधिक मीठे पेय, चिप्स, बिस्कुट और फास्ट फूड देने से बचना चाहिए। डॉ. प्रभात ने कहा कि पहले छह महीने तक शिशु के लिए मां का दूध सर्वोत्तम आहार है।
इसके बाद बच्चे की उम्र के अनुसार पूरक आहार शुरू किया जाना चाहिए। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसके भोजन में विभिन्न प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों में लगातार कम वजन, कमजोरी, भूख न लगना, बार-बार बीमार पडऩा या उम्र के अनुसार विकास न होना जैसे लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। पोषण की कमी का समय पर पता लगाकर उचित खानपान और उपचार से बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। डॉ. प्रभात के अनुसार, स्वस्थ बचपन की शुरुआत सही पोषण से होती है। इसलिए राष्ट्रीय पोषण सप्ताह केवल एक सप्ताह तक जागरूकता का अवसर नहीं, बल्कि परिवार में रोजाना संतुलित और पौष्टिक भोजन की आदत विकसित करने का संदेश है।