अनुसंधान और प्रौद्योगिकी को वास्तविक जीवन की आवश्यकताओं से जोडक़र प्रभावी समाधान विकसित करने पर संगोष्ठी आयोजित
एआईसीटीई वानी के संयोजन में स्मार्ट एवं हरित शहरी विकास की दिशा में एमआरआईआईआरएस ने की सार्थक पहल
फरीदाबाद। स्मार्ट मोबिलिटी, सतत शहरी विकास और उभरती प्रौद्योगिकी पर केंद्रित दो दिवसीय एआईसीटीई वानी संगोष्ठी का आयोजन मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज तत्वावधान में विश्वविद्यालय परिसर में किया गया। संगोष्ठी का विषय ‘इंटिग्रेटड स्मार्ट मोबिलिटी एंड अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर फार सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ था। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान और प्रौद्योगिकी को वास्तविक जीवन की आवश्यकताओं से जोडक़र प्रभावी समाधान विकसित करना था। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में आईआईटी दिल्ली के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. वसंत मत्सागर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। संस्थान के प्रो वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) प्रदीप कुमार तथा प्रोफेसर एवं सहायक अधिष्ठाता डॉ. गीता निजावन ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।
उद्घाटन सत्र ने भारत के तेजी से बदलते शहरी विकास के लिए तकनीक आधारित, टिकाऊ और प्रभावी समाधानों पर आईआईटी एस व एनआईटी एस, प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों तथा उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने सहभागिता करते हुए अपने विचार रखे। सीएसआईआर-सीआरआरआई और एनसीसीबीएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की भागीदारी ने कार्यक्रम को बहुविषयक दृष्टिकोण प्रदान किया और शहरी गतिशीलता तथा बुनियादी ढांचे से जुड़ी समकालीन चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श का अवसर दिया। संस्थान के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सेंतिल वडिवेल टी. के मार्गदर्शन में आयोजित संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में स्मार्ट सिटीज एवं सतत शहरी विकास, स्मार्ट मोबिलिटी एवं यातायात प्रबंधन, ऊर्जा-कुशल एवं जलवायु-अनुकूल शहरी अवसंरचना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए यातायात दबाव, शहरी गतिशीलता, पर्यावरणीय स्थिरता तथा बुनियादी ढांचे की मजबूती जैसी चुनौतियों के लिए अनुसंधान-आधारित एवं व्यावहारिक समाधानों पर विशेष जोर दिया।
संवादात्मक सत्रों के माध्यम से शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करने तथा सुरक्षित, स्मार्ट, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार शहरों के विकास की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम का समापन एनसीसीबीएम के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. पी.एन.ओझा की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित समापन सत्र के साथ हुआ। सह-समन्वयक के रूप में सिविल इंजीनियरिंग विभाग की . सोनल सलूजा, एसोसिएट प्रोफेसर, डा.सोनल सलूजा ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रो.वाइस चांसलर डा.प्रदीप कुमार ने कहा कि संगोष्ठी का सफल आयोजन एमआरआईआईआरएस की नवाचार, अनुसंधान, सतत विकास एवं उद्योग-अकादमिक सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पहल भारत के लिए स्मार्ट, हरित, सुदृढ़ और प्रौद्योगिकी-सक्षम शहरी बुनियादी ढाँचे के निर्माण की दिशा में एक सार्थक कदम के रूप में सामने आई। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।