परमात्मा के प्रति समर्पित हो जाओगे तो मिलेगा कष्टों से छुटकारा : स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य

गुरु चरण कमल अनुरागियों ने श्रद्धा और समर्पण भाव से मनाया गुरु पूर्णिमा महोत्सव

फरीदाबाद। सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम-श्रीसिद्धदाता आश्रम में गुरुपूर्णिमा महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को गुरु-शिष्य परम्परा में आस्था के रंग दिखाई दिए। भक्तों की श्रद्धा, कृतज्ञता, समर्पण और आत्मिक आनंद के अनेक रूप देखने को मिले। प्रत्येक श्रद्धालु कृतज्ञता का भाव लिए जीवन को ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने के लिए श्रीसदगुरुदेव के प्रति आभार व्यक्त करता तो तन, मन, और सेवा भावना के साथ अपने अहंकार को गुरु के चरणों में त्यागने का भाव दिखा। कुछ भक्तगण गुरु की असीम कृपा को याद करके भक्ति के अतिरेक में आंखों से प्रेम के आंसूओं के साथ हृदय द्रवित होता दिखा। आश्रम परिसर गुरु भक्ति के भाव से सराबोर रहा और देर रात तक भक्तगण श्रद्धा, भक्ति और विश्वास के साथ गुरू चरण वंदना में लीन रहे।

बुधवार को प्रात:काल से ही भक्तों की भीड़ हो गई। देश के विभिन्न राज्यों से भक्तगण आश्रम पहुंचे।  श्रीरामानुज संप्रदाय की इंद्रप्रस्थ व हरियाणा तीर्थपीठ के पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के सान्निध्य में सबसे पहले वैकुंठवासी श्रीमद जगदगुरु स्वामी सुदर्शनाचार्य जी महाराज की समाधि पर पुष्पांजिल अर्पित करते हुए पूजा-अर्चना और प्राचीन धुने पर जनकल्याण के लिए हवन किया गया।  भक्तों के बीच प्रवचन करते हुए श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि ईश्वर बिना किसी कारण के सभी जीवों से प्रेम करने वाले और परम दयालु हैं। परमात्मा ने हमारों कई जन्मों के बाद, कभी अत्यंत कृपा करके जीव को सौभाग्य से यह दुर्लभ मनुष्य शरीर प्रदान किया है। सभी सद्ग्रंथों और पुराणों में कहा गया है कि यह मानव शरीर देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। मानव शरीर सभी पुण्यों का धाम और मोक्ष (मुक्ति) को पाने का मुख्य साधन है। यह शरीर बार-बार नहीं मिलेगा।

इसलिए प्रभु की भक्ति अवश्य करनी चाहिए। ईश्वर स्वरुप गुरू के प्रति समर्पित हो जाओगे तो कष्टों से अवश्य ही छुटकारा मिलेगा। लेकिन इसके लिए सदगुरु आवश्यक है। भगवान ने स्वयं ही कहा कि गुरु उनसे भी बढक़र है। इसलिए गुरु की युक्तियों को ज्ञान को अपने जीवन में बिना किसी हिचक के स्वीकार करना चाहिए। गुरु ऊर्जा है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा एकत्र करने का सरल साधन प्रभु भक्ति है। इस बीच सदगुरु महाराज की शिष्य आशा गर्ग धर्मपत्नी शिव कुमार गर्ग ने अपने परिवार के अनुभवों पर आधारित लिखी पुस्तक भाव पुष्प का विमोचन श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के कर कमलो से कराया। शहर प्रथम नागरिक महापौर श्रीमती प्रवीण जोशी,  पूर्व शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा, पूर्व विधायक ललित नागर, आईएएस अशोक शर्मा ने सद्गुरुदेव महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया  इस अवसर पर जयपुर से आए प्रसिद्ध गायक संजय पारिख और मुख्य पुजारी रमाकांत ने अपने सुमधुर भजनों से भक्तों को भावविभोर कर दिया।

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