हाईकोर्ट : 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को देेना ही होगा दाखिला, मंच ने किया फैसले का स्वागत
फरीदाबाद। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राइट टू एजुकेशन (आरटीई) एक्ट के तहत प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले को पूरी तरह जायज ठहराया है और इसे लागू करने के कड़े निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी जनवरी 2026 के अपने आदेश में कहा था कि आरटीई के तहत राज्य सरकारों को पात्र छात्रों को दाखिला दिलवाना चाहिए और प्राइवेट स्कूलों को भी अपने स्कूल में गरीब बच्चों को दाखिला देना चाहिए। हरियाणा अभिभावक एकता मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा व जिला महासचिव एडवोकेट बीएस विरदी ने फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री से मांग की है कि प्रदेश के जिन प्राइवेट स्कूल संचालकों ने शिक्षा विभाग के आदेश के बाद भी आरटीई के हकदार पात्र छात्र-छात्राओं को दाखिला नहीं दिया है उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए उनकी मान्यता रद्द की जाए।
पंजाब प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की ओर से आरटीई दाखिले के खिलाफ दायर की गई एक याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट की डबल बेंच ने कहा है कि आरटीई एक्ट में गरीब बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना पूरी तरह से कानूनी सही है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि सभी प्राइवेट बिना सहायता प्राप्त (अनएडिड) स्कूलों को कक्षा 1 (या एंट्री लेवल) में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करनी ही होंगी। यह उनका कानूनी और संवैधानिक कर्तव्य है। कोर्ट ने पंजाब सरकार के ऑनलाइन आवेदन,स्कूल मैपिंग और ड्रॉ ऑफ लॉट्स (लकी ड्रा) के जरिए दाखिला देने की पूरी व्यवस्था को जायज और सही ठहराया है। अदालत ने यह भी साफ किया कि जिन बच्चों का नाम ऑनलाइन ड्रा में आ चुका है, प्राइवेट स्कूल उन्हें दाखिला देने से मना नहीं कर सकते।
मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा व जिला अध्यक्ष एडवोकेट शिवकुमार जोशी ने कहा है कि हरियाणा सरकार गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिला दिलाने में पूरी तरह से असफल साबित हुई है। जिला शिक्षा अधिकारी फरीदाबाद ने गत वर्ष सीबीएसई के 28 स्कूलों व इस वर्ष 44 स्कूलों द्वारा पात्र छात्रों को दाखिला न देने की सूची व शिकायत शिक्षा निदेशक को भेजकर दोषी स्कूलों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की थी लेकिन आज तक इन दोषी स्कूलों के खिलाफ कोई भी उचित कार्रवाई नहीं की गई है। सरकार पूरी तरह से इन प्राइवेट स्कूलों के आगे नतमस्तक है। इस वर्ष फरीदाबाद में कुल 1,519 बच्चों का चयन आरटीई के तहत दाखिला देने के लिए किया गया था और उनको स्कूल अलोट कर दिए थे इनमें से 767 बच्चों को ही हरियाणा बोर्ड के निजी स्कूलों ने दाखिला दिया वाकी 752 बच्चों को सीबीएसई के स्कूलों ने दाखिला देने से मना कर दिया। मंच के लीगली प्रयास से अब तक आरटीई दाखिले के 12 पात्र बच्चों को दाखिला दिलवाया जा चुका बाकी को दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।