कचरे को समस्या नहीं, संसाधन बनाना हमारी प्रतिबद्धता: विपुल गोयल

फरीदाबाद । हरियाणा में शहरी कचरा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी, आधुनिक एवं वैज्ञानिक बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम क्लस्टर में चार इंटीग्रेटेड वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन संयंत्रों के शुरू होने के बाद प्रतिदिन कुल 5 हजार टन कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जाएगा और इससे लगभग 50 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन होगा। चारों संयंत्रों के अक्टूबर 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग के माध्यम से प्रदेश के शहरों में स्वच्छता, बेहतर कचरा प्रबंधन और आधुनिक शहरी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। आज की यह पहल केवल कचरे के निपटान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कचरे को ऊर्जा और उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में एक दूरगामी कदम है। उन्होंने कहा कि जिस कचरे को लंबे समय तक शहरों के लिए चुनौती माना जाता रहा है, उसी कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन करके ऊर्जा का उत्पादन करना ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की सोच का प्रभावी उदाहरण बनेगा।

कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि फरीदाबाद क्लस्टर में प्रतिदिन 1,600 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा और इससे न्यूनतम 16 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन अपेक्षित है। फरीदाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर के लिए यह परियोजना स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इससे शहर में कचरे के वैज्ञानिक निपटान को बढ़ावा मिलेगा, कचरे के खुले एवं अवैज्ञानिक निपटान में कमी आएगी तथा ऊर्जा के एक वैकल्पिक स्रोत को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि हिसार क्लस्टर में प्रतिदिन 500 टन कचरे का प्रसंस्करण कर न्यूनतम 5 मेगावाट, अंबाला क्लस्टर में 900 टन कचरे के प्रसंस्करण से न्यूनतम 9 मेगावाट तथा गुरुग्राम क्लस्टर में प्रतिदिन 2 हजार टन कचरे का प्रसंस्करण कर न्यूनतम 20 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा। इस प्रकार चारों संयंत्रों की संयुक्त क्षमता प्रतिदिन 5 हजार टन कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण और 50 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन की होगी।

कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि इन संयंत्रों की सबसे बड़ी विशेषता इनकी एकीकृत एवं आधुनिक तकनीकी व्यवस्था होगी। कचरे को उसकी प्रकृति के अनुसार अलग-अलग तरीके से प्रसंस्कृत किया जाएगा। गीले कचरे से बायोगैस तैयार करने के लिए कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र की व्यवस्था होगी, जबकि ऐसे सूखे कचरे का वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र में प्रसंस्करण किया जाएगा, जिसका पुनः उपयोग या रिसाइकल संभव नहीं है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य कचरे का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना और पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखना है।
उन्होंने कहा कि कचरा प्रबंधन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। घरों और संस्थानों से निकलने वाले कचरे को स्रोत स्तर पर अलग-अलग रखना इस पूरी व्यवस्था की सफलता के लिए बेहद जरूरी है। सरकार आधुनिक संयंत्र और वैज्ञानिक व्यवस्था उपलब्ध करा सकती है, लेकिन स्वच्छता को स्थायी जनआंदोलन बनाने के लिए जनभागीदारी आवश्यक है।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं की स्थापना में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। संयंत्रों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुरूप स्थापित किया जाएगा तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन के साथ पर्यावरणीय मानकों का पूरी तरह पालन हो।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के लिए केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से मजबूत वित्तीय व्यवस्था की गई है। भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत परियोजनाओं को वित्तीय सहायता मिलेगी। परियोजनाओं की कुल पूंजीगत लागत का 25 प्रतिशत केंद्र सरकार, 25 प्रतिशत राज्य सरकार एवं शहरी स्थानीय निकायों द्वारा तथा शेष 50 प्रतिशत राशि ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा वहन की जाएगी।

कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि हरियाणा के शहरों को स्वच्छ, सुंदर, स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए शहरी स्थानीय निकाय विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। आधुनिक कचरा प्रबंधन की यह व्यवस्था आने वाले समय में प्रदेश के शहरी विकास को नई दिशा देगी। हमारा प्रयास है कि शहरों में कचरे के ढेर दिखाई देने के बजाय कचरे से ऊर्जा पैदा हो, कचरा बोझ न बने बल्कि संसाधन बने और स्वच्छता केवल सरकारी अभियान नहीं बल्कि हर नागरिक की जीवनशैली का हिस्सा बने।

कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के स्वच्छ भारत और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ के विजन तथा माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में हरियाणा सरकार प्रदेश के शहरों को स्वच्छ, स्वस्थ, सुंदर और आधुनिक बनाने के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। सरकार का संकल्प है कि कचरे को समस्या से समाधान, बोझ से संसाधन और संसाधन से संपदा में परिवर्तित कर हरियाणा को स्वच्छ एवं सतत विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाए।

इन संयंत्रों की स्थापना ऑयल इंडिया लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा की जाएगी, जिससे हरियाणा में आधुनिक कचरा प्रबंधन और शहरी विकास को नई गति मिलेगी।

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