मानसिक तनाव को नजरअंदाज न करें, समय पर जांच जरूरी : डॉ. रोहित गुप्ता
फरीदाबाद। विश्व सुसाइड प्रिवेंशन डे के अवसर पर एकॉर्ड अस्पताल न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. रोहित गुप्ता ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि लगातार तनाव, अवसाद, चिंता, नींद में बदलाव और सामाजिक रूप से अलग-थलग रहने जैसी स्थितियों को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते व्यक्ति की परेशानी को समझकर उसे उचित सहयोग और उपचार उपलब्ध कराया जाए तो कई गंभीर परिस्थितियों को टाला जा सकता है। डॉ. गुप्ता ने कहा कि मानसिक परेशानी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है। इसे कमजोरी या शर्म का विषय मानने के बजाय स्वास्थ्य संबंधी समस्या के रूप में देखना चाहिए। परिवार और मित्रों की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण है।
यदि कोई व्यक्ति लगातार उदास रहता है, खुद को दूसरों से अलग करने लगता है, निराशा की बातें करता है या अपने जीवन को लेकर नकारात्मक विचार व्यक्त करता है तो उसकी बात को गंभीरता से सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में व्यक्ति को अकेला छोडऩे के बजाय उसके साथ संवाद बनाए रखना और विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक या हेल्पलाइन से समय पर संपर्क करना महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। डॉ. रोहित गुप्ता ने लोगों से अपील की कि अपने आसपास के लोगों के व्यवहार में होने वाले असामान्य बदलावों पर ध्यान दें और जरूरत पडऩे पर बिना किसी झिझक के चिकित्सकीय सहायता लें। उन्होंने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि समाज की निरंतर जिम्मेदारी है। संवेदनशील बातचीत, परिवार का सहयोग और समय पर उपचार किसी व्यक्ति को संकट से बाहर आने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।